*30 दिन–30 कार्यशाला अभियान की 26वीं कार्यशाला में अल्पविराम, आत्म-संवाद, मूल्यों और जिम्मेदार नागरिक भागीदारी पर हुआ संवाद*
शिवपुरी। हम अक्सर आनंद को बाहर तलाशते हैं—सुविधाओं में, उपलब्धियों में और परिस्थितियों के बदलने में। लेकिन क्या कभी कुछ पल रुककर अपने भीतर झांककर देखा है कि आनंद की वास्तविक जगह कहां है? इसी सवाल के साथ आनंद विभाग जिला शिवपुरी की ‘30 दिन–30 कार्यशाला अभियान’ की 26वीं कार्यशाला शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय शिवपुरी में आयोजित हुई।
कार्यशाला का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्य आशा ग्रेस एवं आनंद विभाग के जिला संपर्क व्यक्ति अभय कुमार जैन ने सामूहिक प्रार्थना के साथ किया। शुरुआत से ही प्रतिभागियों को आनंद को केवल सुनने या समझने के बजाय उसे अपने जीवन में महसूस करने और स्वयं से जोड़कर देखने का अवसर मिला।
मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित ने ‘आनंद की ओर’ विषय के माध्यम से अल्पविराम की अवधारणा से प्रतिभागियों को जोड़ा। उन्होंने कहा कि जीवन की लगातार भागती हुई दिनचर्या के बीच लिया गया छोटा-सा ठहराव व्यक्ति को अपने भीतर देखने का अवसर देता है। आनंद भौतिक सुख-सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे अनुभव करने का एक बड़ा स्रोत स्वयं हमारे भीतर मौजूद है।
इसके बाद राजेश पटेल ने अल्पविराम को ‘कनेक्शन–करेक्शन–डायरेक्शन’ से जोड़ते हुए प्रतिभागियों को स्वयं के साथ जुड़कर अपने भीतर की यात्रा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि स्वयं से कनेक्शन होने पर व्यक्ति अपने व्यवहार और मूल्यों को अधिक स्पष्टता से देख पाता है। जहां आवश्यक हो वहां करेक्शन किया जाए तो जीवन की सही डायरेक्शन भी सामने आने लगती है। उन्होंने अपने जीवन में कनेक्शन, करेक्शन और डायरेक्शन से जुड़े अनुभव भी साझा किए।
कार्यशाला में ‘फ्रीडम ग्लास’ गतिविधि के माध्यम से प्रमोद रावत ने पवित्रता, ईमानदारी, निःस्वार्थता और प्रेम जैसे मूल्यों पर संवाद किया। प्रतिभागियों को यह देखने का अवसर मिला कि जीवन में मूल्यों की मौजूदगी केवल विचारों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हमारे व्यवहार और संबंधों में भी दिखाई देती है। उन्होंने स्वयं के भीतर इन मूल्यों को लेकर हुए परिवर्तनों के अनुभव भी साझा किए।
इसके बाद ‘इंडिया आई केयर’ सत्र में ईएनबी प्रीति तिवारी, एम. टोंगपांग एवं प्रमोद रावत ने प्रतिभागियों के साथ देश के प्रति कर्तव्य, अधिकार और जिम्मेदार नागरिक भागीदारी पर संवाद किया। प्रतिभागियों ने अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों को समझते हुए देश के प्रति अपनी सकारात्मक और जिम्मेदार भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
कार्यशाला के समापन अवसर पर बृजेश सिंह तोमर ने प्रतिभागियों से फीडबैक प्राप्त किया। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कार्यशाला ने उन्हें रोजमर्रा की व्यस्तता से कुछ समय अलग होकर स्वयं के साथ जुड़ने, अपने मूल्यों को देखने और जीवन को एक नई दृष्टि से समझने का अवसर दिया।
कार्यशाला का मूल संदेश यही रहा कि कभी-कभी जीवन को बदलने के लिए आगे बढ़ना नहीं, कुछ पल ठहरना जरूरी होता है। यही ठहराव हमें स्वयं से जोड़ता है और भीतर मौजूद आनंद की ओर ले जाता है।

