बच्चों को पढ़ाने वालों ने पढ़ा अपना जीवन—नरवर में शिक्षकों के लिए हुआ ‘अल्पविराम

 



*30 दिन–30 कार्यशाला अभियान की 25वीं कार्यशाला गुरुकुल स्टडी हाईस्कूल में सम्पन्न*


नरवर। आनंद विभाग जिला शिवपुरी द्वारा सितंबर माह में चलाए जा रहे ‘30 दिन–30 कार्यशाला अभियान’ के अंतर्गत 25वीं कार्यशाला गुरुकुल स्टडी हाईस्कूल नरवर में शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए आयोजित की गई। कार्यशाला का शुभारंभ विद्यालय के संचालक धीरज गुप्ता एवं पूजा गुप्ता ने मां वीणावादिनी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया।



कार्यशाला में राज्य आनंद संस्थान का परिचय आनंदम सहयोगी पुष्पेन्द्र लोधी ने देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां नागरिकों की खुशहाली के लिए आनंद संस्थान का गठन किया गया है। उन्होंने संस्थान के उद्देश्य एवं आनंद की अवधारणा से शिक्षक-शिक्षिकाओं को परिचित कराया।


कार्यशाला के प्रथम सत्र में मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित ने ‘अल्पविराम’ के माध्यम से शिक्षक-शिक्षिकाओं को अपने जीवन में आनंद को पहचानने तथा उसके बढ़ने और घटने के कारणों पर विचार करने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि हमें अपने आनंद की चाबी अपने पास रखनी चाहिए। उन्होंने बताया कि जब व्यक्ति अपने आनंद के कारणों को स्वयं पहचानता है, तो वह परिस्थितियों के बजाय अपने भीतर सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।


आनंदम सहयोगी ऋषि सेन ने ‘लाइफ बैलेंस शीट’ के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने जीवन का आत्ममंथन कराया। उन्होंने जीवन को लाभ-हानि के रूप में देखते हुए बताया कि मदद, कृतज्ञता, क्षमा मांगना और क्षमा करना जैसे मूल्य जीवन के लेखा-जोखा को लाभ की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


रिश्तों के सत्र में आनंदम सहयोगी प्रियांशु भार्गव ने शिक्षक-शिक्षिकाओं के जीवन में रिश्तों के महत्व पर संवाद किया। उन्होंने रिश्तों के टूटने और मधुर होने के कारणों पर ‘अल्पविराम’ कराया तथा अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि आत्मचिंतन और संवाद के माध्यम से रिश्तों में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।


वहीं आनंदम सहयोगी राजेश पटेल ने जीवन की चिंताओं पर संवाद करते हुए ‘चिंता का दायरा और प्रभाव का दायरा’ विषय पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि अल्पविराम के माध्यम से व्यक्ति अपनी चिंताओं को पहचानकर उन विषयों पर ध्यान केंद्रित कर सकता है, जिन पर उसका प्रभाव है। इससे समस्याओं के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने और अनावश्यक चिंता से मुक्त होने का मार्ग प्रशस्त होता है।


कार्यशाला में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने विभिन्न गतिविधियों एवं आत्मचिंतन के माध्यम से अपने आनंद, जीवन के मूल्यों, रिश्तों और चिंताओं को नए दृष्टिकोण से समझने का अभ्यास किया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को स्वयं के जीवन में ठहराव लेकर अपने भीतर झांकने और आनंदपूर्ण जीवन की संभावनाओं को पहचानने का अवसर देना रहा।

Post a Comment

Previous Post Next Post