*30 दिन–30 कार्यशाला अभियान की 24वीं कार्यशाला में अल्पविराम के जरिए जीवन, मूल्यों और स्वयं से जुड़ाव पर हुआ आत्मीय संवाद*
नरवर। आनंद विभाग जिला शिवपुरी द्वारा सितंबर माह में चलाए जा रहे ‘30 दिन–30 कार्यशाला अभियान’ के अंतर्गत 24वीं कार्यशाला शासकीय स्नातक महाविद्यालय नरवर में आयोजित की गई। कार्यशाला में विद्यार्थियों ने पढ़ाई और रोजमर्रा की व्यस्तताओं से कुछ पल ठहरकर स्वयं को समझने और जीवन को बेहतर ढंग से देखने का अनुभव किया।
कार्यशाला का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य नवल किशोर, डॉ. रुपेश श्रीवास्तव एवं प्रोफेसर कनिका गुप्ता, डॉ सुनील शर्मा, प्रो धर्मेन्द्र रावत, डॉ रामनरेश इंदौरिया,प्रो नारायण बहादुर द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित ने विद्यार्थियों से जीवन की समस्याओं और उनके समाधान को लेकर आत्मीय संवाद किया। ‘इन समस्याओं का जिम्मेदार कौन है?’ विषय पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को अल्पविराम के माध्यम से स्वयं के भीतर झांकने, अपनी भूमिका को समझने और समाधान की दिशा में स्वयं पहल करने के लिए प्रेरित किया गया।
अगले सत्र में प्रियांशु भार्गव ने पवित्रता, ईमानदारी, निःस्वार्थता और प्रेम जैसे जीवन मूल्यों पर संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अल्पविराम लेकर अपने व्यवहार और जीवन में इन नैतिक मूल्यों की उपस्थिति को स्वयं जांचने तथा उन्हें जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला के अगले सत्र में राजेश पटेल ने प्रतिभागियों से अल्पविराम के माध्यम से स्वयं के जीवन में कनेक्शन स्थापित करने और अपने भीतर आवश्यक करेक्शन के जरिए जीवन में सही डायरेक्शन की ओर बढ़ने के अनुभव साझा किए।
वहीं पुष्पेंद्र लोधी ने ‘फ्रीडम ग्लास’ गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वयं के भीतर झांकने का अवसर दिया। उन्होंने अल्पविराम के अभ्यास से जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को पहचानने और उन्हें अपने व्यक्तिगत अनुभवों से जोड़ने के लिए प्रेरित किया।
समापन सत्र में आनंदम सहयोगी ऋषि सेन ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए कार्यशाला का फीडबैक लिया। विद्यार्थियों ने साझा किया कि कुछ पल ठहरकर स्वयं से जुड़ना उन्हें अपने विचारों, व्यवहार और जीवन की परिस्थितियों को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर देता है।


