*30 दिन–30 कार्यशाला अभियान की 23वीं कार्यशाला डाइट शिवपुरी में सम्पन्न*
शिवपुरी। पढ़ाई और भविष्य की चिंताओं के बीच जीवन में रिश्तों की मिठास और मन की शांति कितनी जरूरी है, इसे समझने का अवसर बुधवार को डाइट शिवपुरी के छात्र-छात्राओं को मिला। आनंद विभाग जिला शिवपुरी द्वारा सितंबर माह में आयोजित ‘30 दिन–30 कार्यशाला अभियान’ की 23वीं कार्यशाला डाइट शिवपुरी में आयोजित की गई।
कार्यशाला का शुभारंभ प्राचार्य शरीफ खान, जितेन्द्र गुप्ता एवं राजेश श्रीवास्तव द्वारा सामूहिक प्रार्थना के साथ किया गया। इसके बाद जिला संपर्क व्यक्ति अभय कुमार जैन ने राज आनंद संस्थान का परिचय देते हुए उसके उद्देश्यों एवं आनंद की अवधारणा से प्रतिभागियों को परिचित कराया। उन्होंने ‘अल्पविराम’ का परिचय कराते हुए जीवन में कुछ पल ठहरकर स्वयं को समझने और अपने अनुभवों पर चिंतन करने का अभ्यास कराया।
कार्यशाला के अगले सत्र में राजेश पटेल ने ‘रिश्ते’ विषय पर प्रतिभागियों से संवाद किया। उन्होंने जीवन में रिश्तों के महत्व को रेखांकित करते हुए यह समझने का अवसर दिया कि किन कारणों से रिश्तों में मधुरता आती है और किन कारणों से दूरियां बढ़ती हैं। उन्होंने अपने रिश्तों का मैप प्रतिभागियों के साथ साझा करते हुए अल्पविराम के माध्यम से रिश्तों में आए सकारात्मक बदलावों के अनुभव भी साझा किए।
इसके बाद मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित ने ‘चिंता का दायरा और प्रभाव का दायरा’ विषय पर प्रतिभागियों से संवाद किया। उन्होंने बताया कि जीवन में कई ऐसी चिंताएं होती हैं, जिन पर हमारा सीधा नियंत्रण नहीं होता, जबकि कुछ विषय ऐसे होते हैं जिन पर हम अपने प्रयासों से प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि अल्पविराम के माध्यम से उन्होंने विभिन्न चिंताओं को पहचानने और उनसे बाहर निकलने का प्रयास कैसे किया।
कार्यशाला के समापन अवसर पर ईएनबी प्रमोद रावत ने प्रतिभागियों से कार्यक्रम को लेकर फीडबैक प्राप्त किया। छात्र-छात्राओं ने कार्यशाला के अनुभव साझा करते हुए बताया कि अल्पविराम ने उन्हें अपने रिश्तों, चिंताओं और स्वयं के जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर दिया।
कार्यशाला का आत्मीय संदेश रहा—रिश्तों को समय दें, चिंताओं में उलझने के बजाय अपने प्रभाव के दायरे पर काम करें और जीवन की भागदौड़ के बीच कुछ पल खुद के लिए जरूर ठहरें।



