जब जीवन की नदी में आए रुकावटें, ‘अल्पविराम’ ने सिखाया आगे बढ़ना

 


*30 दिन–30 कार्यशाला अभियान की 22वीं कार्यशाला शासकीय स्नातक महाविद्यालय करैरा में सम्पन्न*


करैरा। जीवन में आने वाली परिस्थितियां हमेशा हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं, लेकिन उन परिस्थितियों के प्रति हमारी प्रतिक्रिया हमारे हाथ में होती है। इसी समझ के साथ आनंद विभाग जिला शिवपुरी के ‘30 दिन–30 कार्यशाला अभियान’ के अंतर्गत 22वीं कार्यशाला शासकीय स्नातक महाविद्यालय करैरा में आयोजित की गई। कार्यशाला का शुभारंभ प्रोफेसर देवेंद्र कोली ने प्रार्थना के साथ किया।



कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित ने प्रतिभागियों को अपने जीवन में आनंद कब बढ़ता है और कब घटता है, इसके कारणों को पहचानने का अभ्यास कराया। उन्होंने कहा कि जीवन की भागदौड़ के बीच कुछ पल ठहरकर स्वयं को देखना ही ‘अल्पविराम’ है। यह ठहराव व्यक्ति को अपनी भावनाओं, परिस्थितियों और आनंद को समझने का अवसर देता है।



‘जीवन की नदी’ सत्र में प्रीति तिवारी ने नदी के माध्यम से जीवन के उतार-चढ़ाव को समझाया। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उनका जीवन भी नदी की तरह उतार-चढ़ाव और कटाव से भरा रहा। रास्ते में पत्थर और बांध जैसी अनेक रुकावटें आईं, लेकिन अल्पविराम के अभ्यास ने जीवन की दिशा को समझने और उसे फूलों से भरने की प्रेरणा दी।



एम. टोंगपांग ने ‘चिंता का दायरा और प्रभाव का दायरा’ विषय पर प्रतिभागियों को अपनी चिंताओं की सूची बनाने का अभ्यास कराया। उन्होंने समझाया कि जब व्यक्ति यह पहचान लेता है कि किन परिस्थितियों पर उसका नियंत्रण है और किन पर नहीं, तो अनावश्यक चिंता से बाहर निकलकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ना आसान हो जाता है।


समापन सत्र में राजेश पटेल ने प्रतिभागियों से फीडबैक प्राप्त किया। वहीं प्रमोद रावत ने आइस ब्रेकर गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को अल्पविराम के महत्व को सहज और रोचक तरीके से समझाया। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने स्वयं को समझने, चिंताओं को पहचानने और जीवन में आनंद को बढ़ाने के विभिन्न अभ्यास किए।

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