हर घटना के बाद प्रतिक्रिया देने से पहले ठहरना जरूरी, एक ‘अल्पविराम’ बदल सकता है सोचने का नजरिया

 


*आनंद विभाग शिवपुरी के 30 दिन–30 कार्यशालाएं अभियान की 10वीं कार्यशाला आयोजित*


शिवपुरी। राज्य आनंद संस्थान, जिला शिवपुरी द्वारा सितंबर माह में चलाए जा रहे “30 दिन–30 कार्यशालाएं” अभियान के अंतर्गत विश्व आत्महत्या निषेध दिवस के अवसर पर शासकीय श्रीमंत माधवराव सिंधिया पी.जी. कॉलेज, शिवपुरी में 10वीं अल्पविराम परिचय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में विद्यार्थियों को जीवन की कठिन परिस्थितियों में ठहरने, संवाद करने, अपनी भावनाओं को समझने और सकारात्मक विकल्प तलाशने का संदेश दिया गया।


कार्यशाला की शुरुआत श्री अभय जैन द्वारा आनापान से कराई गई। इसके बाद श्री साकेत पुरोहित ने राज्य आनंद संस्थान एवं ‘अल्पविराम’ की अवधारणा से प्रतिभागियों को परिचित कराया।


सुश्री प्रीति तिवारी ने “Here to There” एवं “कौन है जिम्मेदार?” सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी वर्तमान परिस्थितियों को समझने तथा उनमें सकारात्मक बदलाव की दिशा तलाशने के लिए प्रेरित किया।


कार्यशाला का महत्वपूर्ण सत्र “Event–Response–Reaction” श्री ब्रजेश सिंह तोमर द्वारा लिया गया। विश्व आत्महत्या निषेध दिवस के संदर्भ में उन्होंने बताया कि जीवन में आने वाली हर कठिन घटना के बाद व्यक्ति के सामने प्रतिक्रिया देने का विकल्प होता है। कई बार परेशानी स्वयं घटना से अधिक हमारी तत्काल प्रतिक्रिया और उससे जुड़ी सोच को प्रभावित करती है। ऐसे समय में यदि व्यक्ति प्रतिक्रिया देने से पहले एक पल ठहर जाए, किसी अपने से बात करे और परिस्थिति को दूसरे दृष्टिकोण से देखने का प्रयास करे, तो वह नकारात्मक विचारों के बीच भी नए रास्ते तलाश सकता है।


उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि किसी व्यक्ति के व्यवहार या मनोदशा में अचानक बदलाव दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय उससे संवाद करना और उसकी बात सुनना जरूरी है। मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि स्वयं के जीवन के प्रति जिम्मेदारी है। उन्होंने ‘अल्पविराम’ को इसी ठहराव और संवाद का माध्यम बताते हुए कहा कि कई बार जीवन में आगे बढ़ने के लिए सबसे पहले कुछ क्षण रुकना जरूरी होता है।


कार्यशाला के अंत में प्रमोद रावत एवं प्रीति सूर्येश ने प्रतिभागियों के साथ अपने जीवन में ‘अल्पविराम’ से आए सकारात्मक परिवर्तनों के अनुभव साझा किए। इसके बाद प्रतिभागियों से फीडबैक लिया गया। विद्यार्थियों ने बताया कि कार्यशाला ने उन्हें अपनी प्रतिक्रियाओं, भावनाओं और जीवन की परिस्थितियों को नए नजरिए से देखने का अवसर दिया।


कार्यशाला का संदेश रहा कि जीवन में कठिनाइयां आ सकती हैं, लेकिन कठिन समय में अकेले रहने के बजाय संवाद करना, मदद लेना और उम्मीद का दामन थामे रखना जरूरी है। कभी-कभी एक छोटा-सा ‘अल्पविराम’ जीवन को नई दिशा दे सकता है।

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