*30 दिन–30 कार्यशालाएं अभियान की 11वीं कार्यशाला आईटीआई शिवपुरी में संपन्न*
शिवपुरी। आनंद विभाग जिला शिवपुरी द्वारा सितंबर माह में आयोजित किए जा रहे ‘30 दिन–30 कार्यशालाएं’ अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र (आईटीआई), शिवपुरी में 11वीं कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों ने ‘अल्पविराम’ के माध्यम से कुछ पल स्वयं के जीवन में झांकते हुए अपने रिश्तों, व्यवहार और जीवन के अनुभवों को समझने का प्रयास किया।
कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर ब्रजेश सिंह तोमर ने ‘लाइफ बैलेंस शीट’ सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को स्वयं से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों पर अल्पविराम लेने के लिए प्रेरित किया। प्रतिभागियों ने अपनी लाइफ बैलेंस शीट तैयार करते हुए विचार किया कि मैंने किसकी मदद की, मेरी मदद किसने की, मैंने किसे दुःख दिया और मुझे किसने दुःख दिया।
इन सवालों पर जब प्रतिभागियों ने ठहरकर अपने जीवन में झांका तो कई भावुक क्षण सामने आए और शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित विद्यार्थियों की आंखें भी नम हो गईं। प्रतिभागियों ने महसूस किया कि जिंदगी इतनी भी बड़ी नहीं है, जितना हम सोचते हैं। इसलिए सही समय पर अपनों से क्षमा मांग लेना, दूसरों को क्षमा कर देना तथा जिन्होंने जीवन में सहयोग किया है, उनके प्रति कृतज्ञता और धन्यवाद व्यक्त कर देना जरूरी है। इसके लिए कल का इंतजार नहीं करना चाहिए। जीवन में समय रहते किए गए ये छोटे-छोटे प्रयास रिश्तों और जीवन की ‘लाइफ बैलेंस शीट’ को बेहतर बना सकते हैं।
मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित ने ‘आनंद की ओर’ सत्र में प्रतिभागियों को अपने जीवन के आनंद को पहचानने तथा उसके बढ़ने और घटने के कारणों पर अल्पविराम लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यदि हमें निरंतर आनंदित रहना है तो सबसे पहले उन कारणों को पहचानना होगा, जिनसे हमारे जीवन में आनंद कम होता है। जब हम इन कारणों को पहचानकर उन पर कार्य करना शुरू करते हैं, तो निरंतर आनंद में जीने का अभ्यास विकसित किया जा सकता है।
कार्यशाला का शुभारंभ जिला संपर्क व्यक्ति अभय कुमार जैन एवं आईटीआई प्राचार्य हेमंत दंडौतिया ने प्रार्थना के साथ किया। कार्यशाला में आनंद संस्थान का परिचय प्रीति तिवारी ने दिया, जबकि ‘आइस ब्रेकर’ गतिविधि नागालैंड के टोंगपांग ने कराई।
कार्यशाला के समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने अपने सकारात्मक अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि ‘अल्पविराम’ ने उन्हें रोजमर्रा की व्यस्तता से कुछ समय निकालकर स्वयं के जीवन और रिश्तों को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर दिया।
इस अवसर पर गोविंद सिंह ठाकुर एवं प्रीति सूर्येश सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।


