शिवपुरी: जिले में 22 अगस्त तक संचालित हो रहे राष्ट्रव्यापी गाजरघास उन्मूलन जागरूकता अभियान के तहत कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) शिवपुरी ने हैप्पी डेज स्कूल में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। केंद्र प्रमुख डॉ. पुनीत कुमार के निर्देशन में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एम.के. भार्गव ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को इस आक्रामक खरपतवार के खतरों और प्रबंधन के उपायों से अवगत कराया।
मानव स्वास्थ्य, पशुधन और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा
डॉ. भार्गव ने बताया कि पार्थेनियम (गाजरघास) हवा, पानी और मवेशियों के जरिए तेजी से फैलती है। इसके संपर्क में आने से मनुष्यों में त्वचा रोग, एलर्जी और दमा जैसी सांस से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। चारे में इसके शामिल होने से पशुओं का स्वास्थ्य बिगड़ता है और दुग्ध उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इसके अलावा, यह फसलों के पोषक तत्व खींचकर भूमि की उर्वरता को कम कर देती है।
गाजरघास की रोकथाम और नियंत्रण के प्रमुख उपाय:
- फूल आने से पहले निष्कासन: बीज बनने से पहले पौधों को जड़ से उखाड़ना सबसे प्रभावी जैविक उपाय है।
- सुरक्षात्मक सावधानी: गाजरघास उखाड़ते समय हाथों में दस्ताने और चेहरे पर मास्क अथवा कपड़ा जरूर पहनें।
- प्रतिस्पर्धी पौधे लगाना: खाली जमीन और मेड़ों पर गेंदे के पौधे लगाकर इसकी वृद्धि को प्राकृतिक रूप से दबाया जा सकता है।
- रासायनिक नियंत्रण: आवश्यकता पड़ने पर कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से मेट्रीब्यूजिन या एट्राजिन जैसे खरपतवारनाशकों का उपयोग करें।
कार्यशाला के समापन पर शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को अपने घर, विद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों को गाजरघास मुक्त बनाने के लिए सामुदायिक भागीदारी निभाने का संकल्प दिलाया गया।

