शिवपुरी। जिले सहित पोहरी क्षेत्र में बिना लाइसेंस संचालित हो रहे कथित "डंडा बैंक" और अवैध सूदखोरी का कारोबार लगातार फल-फूल रहा है। पीड़ितों का आरोप है कि 10, 20 और 30 प्रतिशत तक मासिक ब्याज पर पैसा देकर लोगों को कर्ज के जाल में फंसाया जा रहा है। सबसे अधिक शिकार मध्यम वर्गीय और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार हो रहे हैं, जो जरूरत के समय मजबूरी में इन सूदखोरों से रकम लेने को विवश हैं।
पीड़ितों के अनुसार, ब्याज की भारी-भरकम राशि समय पर जमा नहीं करने पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। कई मामलों में हाथ-पैर तोड़ने और जान से मारने तक की धमकियां दिए जाने के आरोप लगाए गए हैं। पोहरी क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि कुछ अवैध ब्याज कारोबारियों के पास सरकारी कर्मचारियों के एटीएम कार्ड और हस्ताक्षरित चेक तक रखे हुए हैं। आरोप है कि वेतन खाते में सैलरी आते ही पूरी राशि निकाल ली जाती है और कर्जदार के हाथ में कुछ नहीं बचता।
पीड़ितों का कहना है कि ब्याज की किस्त में देरी होने पर 10 प्रतिशत प्रतिदिन तक की अतिरिक्त पेनल्टी वसूली जाती है, जिससे लोग कर्ज के चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल पाते। कई परिवार आर्थिक, मानसिक और सामाजिक संकट का सामना कर रहे हैं।
जिले एवं पोहरी विधानसभा क्षेत्र के प्रभावित लोगों ने कलेक्टर अर्पित वर्मा एवं पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया से मांग की है कि बिना लाइसेंस संचालित हो रहे अवैध ब्याज कारोबारियों की व्यापक जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही पीड़ित परिवारों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को सूदखोरी के इस कथित जाल से राहत मिल सके। शीघ्र ही सभी के नाम सहित समाचार प्रकाशित किया जाएगा।
(नोट: समाचार में लगाए गए आरोप पीड़ितों द्वारा बताए गए तथ्यों पर आधारित हैं। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
