शिवपुरी 5 अप्रैल। न्यायालय श्रीमान सुश्री प्रिया शर्मा ने एक पांच लाख के चैक बाउंस के मामले में दोनों पक्षों के तर्क सुनने के पश्चात आरोपी कमल किशोर झा को दोषमुक्त कर दिया है। आरोपी की ओर से पैरवी भरत ओझा एडवोकेट द्वारा की गई। न्यायालय ने माना कि परिवादी और आरोपी की पुरानी रंजिश चल रही थी और परिवादी एक मंदिर का पुजारी था जिस पर आय का कोई अन्य स्त्रोत नहीं था और न ही वह आरोपी को 5 लाख रूपये उधार देने में सक्षम था।
परिवाद पत्र के अनुसार परिवादी लक्ष्मण त्यागी पुत्र श्री नारायण दास त्यागी निवासी खेडापति मंदिर शिवपुरी ने आरोपी कमल किशोर ओझा पुत्र तुलसीराम ओझा निवासी गुना वायपास चौराहे के पास शिवराज इंजीनियरिंग वर्क्सशॉप शिवपुरी को अपनी पारिवारिक एवं व्यवसायकि आवश्यकता की पूर्ति हेतु उधार स्वरूप 5 लाख रूपये दिनांक 10/5/18 को प्राप्त किये थे और उक्त राशि के एवज में अपने खाते का आगामी दिनांक 10/5/19 का चैक दिया था। जिसे परिवादी ने अपने बैंक में प्रस्तुत किया तो उक्त चैक बिना भुगतान के बैंक से बाउंस हो गया था। इसके पश्चात परिवादी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से रजिस्टर्ड नोटिस जारी किया था जिसे अभियुक्त ने प्राप्त करने के पश्चात भी उक्त नोटिस का कोई जबाव नहीं दिया और न ही परिवादी से ली गई धन राशि अदा की। इसके बाद परिवादी ने माननीय न्यायालय समक्ष आरोपी के विरूद्ध धारा 138 नेगोसियेबल इनस्टूमेंट एक्ट के तहत चैक अनादरण का दावा प्रस्तुत किया गया था और अपनी साक्ष्य कराई गई।
अभियुक्त अधिवक्ता ने बचाव में न्यायालय के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत कर तर्क किये कि परिवादी के मंदिर श्रीखेड्ापति मंदिर की ए बी रोड स्थित जमीन पर आरोपी का गैरिज संचालित होता है और परिवादी ने उक्त गैरिज खाली कराने को लेकर वर्ष 2015 में कई बार शिकायत की है और तब से वर्तमान तक आरोपी एवं परिवादी की रंजिश चली आ रही है इसके अलावा अभियुक्त की ओर से एक एफ आई आर भी प्रस्तुत की गई जिसमें उल्लेख था कि दिनांक 26/9/18 को अभियुक्त ने परिवादी एवं उनके साथी रिटायर डी एस पी सुरेश सिकरवार, अहमद खा व रणवीर सिंह यादव व अन्य तीन लोगों के विरूद्ध मामला पंजीबद्ध हुआ था जिसमें अभियुक्त की उक्त लोगों द्वारा मारपीट की गई थी और उक्त प्रकरण में दबाव बनाने के लिये अभियुक्त का उक्त चैक दिनांक 14/5/19 को भुगतान हेतु प्रस्तुत किया गया जिसका दावा माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। बचाव में यह तर्क प्रस्तुत किये गये कि उक्त प्रकरण में दबाव बनाने के लिये अभियुक्त के विरूद्ध चैक का झूठा मामला प्रस्तुत किया गया था। न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क प्रस्तुत किये गये कि परिवादी लक्ष्मण त्यागी आर्थिक रूप से अभियुक्त को 5 लाख रूपये देने में सक्षम नहीं है। उक्त सभी साक्षों पर विचार करते हुये न्यायालय ने आरोपी को धारा 138 एन आई एक्ट के आरोपी से दोषमुक्त कर दिया है।
