शिवपुरी। सहारा इंडिया चिटफंड कंपनी द्वारा प्रदेश के गरीब निवेशकों के साथ की गई करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में अब कार्रवाई तेज करने की मांग उठी है। शिवपुरी के अधिवक्ता रमेश मिश्रा ने मध्य प्रदेश के गृह मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि प्रदेश भर में दर्ज सैकड़ों प्राथमिकियों (FIR) के बावजूद फरार चल रहे कंपनी के डायरेक्टरों और अधिकारियों पर इनाम घोषित किया जाए।
5 साल बाद भी पुलिस के हाथ खाली
अधिवक्ता रमेश मिश्रा ने पत्र में उल्लेख किया है कि मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में सहारा इंडिया के प्रबंधन के खिलाफ धोखाधड़ी के गंभीर मामले दर्ज हैं। इन मामलों को दर्ज हुए लगभग 5 वर्ष का समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस अब तक आरोपियों को गिरफ्तार करने में असफल रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से प्रदेश के हजारों गरीब निवेशक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और न्याय के लिए परेशान हैं।
जांच में लापरवाही का आरोप
शिकायती पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ जिलों के जांच अधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक की अनुमति से धारा 173(8) के तहत न्यायालय में अधूरा आरोप पत्र (चार्जशीट) पेश कर औपचारिकता पूरी कर ली है। अधिवक्ता के अनुसार, आरोपी जानबूझकर पुलिस से छिप रहे हैं। जब तक उन्हें आधिकारिक रूप से 'फरार' घोषित कर उन पर उचित पुरस्कार (इनाम) की घोषणा नहीं की जाएगी, तब तक उनकी गिरफ्तारी संभव नहीं दिखती।
मुख्य मांगें:
सहारा इंडिया के नामजद डायरेक्टरों और अधिकारियों को तत्काल 'फरार' घोषित किया जाए।
आरोपियों की सूचना देने या गिरफ्तारी करवाने पर उचित नकद इनाम की घोषणा की जाए।
प्रदेश के सभी पुलिस अधीक्षकों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए जाएं।
अधिवक्ता ने गृह मंत्री से निवेदन किया है कि निवेशकों के हित में नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई के आदेश जल्द से जल्द जारी किए जाएं ताकि जनता का कानून पर विश्वास बना रहे।