*सितंबर माह के ‘30 दिन–30 कार्यशालाएं’ अभियान की 12वीं कार्यशाला करैरा महाविद्यालय में सम्पन्न*
करैरा। आनंद विभाग जिला शिवपुरी द्वारा सितंबर माह में आयोजित किए जा रहे ‘30 दिन–30 कार्यशालाएं’ अभियान के अंतर्गत जिले की विभिन्न शासकीय एवं अशासकीय संस्थाओं में कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। इसी अभियान की कड़ी में 12वीं कार्यशाला शासकीय स्नातक महाविद्यालय करैरा में शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित की गई।
कार्यशाला के सत्र में मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित ने प्रतिभागियों से संवाद करते हुए बताया कि जीवन में आने वाली प्रत्येक चिंता के बीच ‘अल्पविराम’ लेकर उसे समझने और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास किया जा सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों से उनके जीवन की चिंताओं की सूची तैयार कराई तथा उन्हें अपने प्रभाव के दायरे में लाकर समाधान खोजने की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने कहा कि जब हम उन बातों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिन पर हमारा प्रभाव है, तो अनावश्यक चिंता कम होती है और जीवन को अधिक सहज एवं तनावमुक्त होकर जीने की राह मिलती है।
कार्यशाला के अगले सत्र में ब्रजेश सिंह तोमर ने ‘घटना और प्रतिक्रिया’ के माध्यम से समझाया कि जीवन में होने वाली हर घटना हमारे नियंत्रण में नहीं होती, लेकिन उस घटना पर हमारी प्रतिक्रिया काफी हद तक हमारे नियंत्रण में होती है। हमारी प्रतिक्रिया ही आगे मिलने वाले परिणाम को प्रभावित करती है। घटना पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देने से सकारात्मक परिणाम और आनंद बढ़ता है, जबकि नकारात्मक प्रतिक्रिया तनाव और आनंद में कमी का कारण बन सकती है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में प्रतिक्रिया देने से पहले अल्पविराम लेना आवश्यक है।
कार्यशाला का शुभारंभ प्रियांशु भार्गव द्वारा आनंद विभाग एवं राज्य आनंद संस्थान के परिचय तथा उनके उद्देश्यों से किया गया। इसके बाद ‘आनंद की ओर’ सत्र में प्रीति तिवारी ने प्रतिभागियों से संवाद करते हुए उन्हें यह विचार करने के लिए प्रेरित किया कि उनके जीवन में आनंद क्या है और किन परिस्थितियों में वह बढ़ता या घटता है। प्रतिभागियों ने इन प्रश्नों पर अल्पविराम लेकर स्वयं के भीतर झांकने का प्रयास किया।
कार्यशाला में एम. टोंगपांग ने प्रतिभागियों के साथ जीवन की चिंताओं को अपने प्रभाव के दायरे में लाकर ‘अल्पविराम’ के माध्यम से उनके समाधान की दिशा तलाशने का अभ्यास कराया।
समापन सत्र में अवध प्रताप सिंह ने प्रतिभागियों से कार्यशाला के अनुभव एवं फीडबैक लिए। प्रतिभागियों ने कहा कि कार्यशाला ने उन्हें रोजमर्रा की चिंताओं और परिस्थितियों के बीच कुछ क्षण ठहरकर स्वयं को देखने तथा अपनी प्रतिक्रियाओं को समझने का अवसर दिया।
कार्यशाला में महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ देवेन्द्र कोली, प्राध्यापक डॉ. शाहजादी शाही नाज, नरेन्द्र जाटव, डॉ. सूर्यांशु चौधरी, डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव, रामकिशन गौतम, रोहित यादव, डॉ. बलवंत सिंह, डॉ. विवेक साहू, डॉ. दिलीप सिंह तोमर, नीरज कुमार कुशवाह, हिदेश यादव, विजय सिंह, सुशील गौतम, कमलेश कुमार, प्रिंस ओझा, दिलीप कोटारी एवं कृष्णदेव वर्मा सहित महाविद्यालय के शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
आनंद विभाग का यह अभियान सितंबर माह में लगातार 30 दिनों तक विभिन्न संस्थाओं में कार्यशालाओं के माध्यम से आनंद, आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच और बेहतर जीवन-दृष्टि की दिशा में जारी है।


