शिवपुरी। मध्यप्रदेश लेखक संघ की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन दुर्गा मठ स्थित सिंहल सभागार में अत्यंत हर्षोल्लास और गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। प्रख्यात गजलकार व व्यंग्यकार डॉ. महेंद्र अग्रवाल की अध्यक्षता और अखलाक खान के कुशल संचालन में आयोजित इस गोष्ठी में सावन की रिमझिम फुहारों के बीच प्रेम, सद्भाव, सामाजिक चेतना और जीवन दर्शन से पिरोई काव्य रचनाओं ने श्रोताओं को आनंदित कर दिया।
कार्यक्रम का शुभ आरंभ अजय अविराम की माँ सरस्वती की मधुर वंदना के साथ हुआ। तत्पश्चात भगवान सिंह यादव ने देशप्रेमी पंक्तियों के साथ अमर शहीद मंगल पांडे के गौरवशाली बलिदान को नमन किया।
मुख्य अतिथि के गीतों ने बिखेरी मधुरता
संघ के वरिष्ठ सदस्य एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. हरि प्रकाश जैन ने अपनी संवेदनशील गजल प्रस्तुत की:
"कैसे बतलाऊँ क्यों उदासी है,
रूह प्यासी है, सांस प्यासी है..."
इसके उपरांत जब उन्होंने अपनी लोकप्रिय एवं भावपूर्ण रचना "नेहा के कुछ फूल लेकर मैं तुम्हारे द्वार आया, आज मुझको याद आई उस सुहानी रात की..." का सस्वर गायन किया, तो पूरा सभागार करतल ध्वनि और तालियों की गूंज से जीवंत हो उठा।
विविध रसों से सजी काव्य संध्या
- प्रेम और गजल का माधुर्य: प्रसिद्ध शायर निर्मल हरि, रामकृष्ण मौर्य और रफीक इशरत ग्वालियरी ने अपनी गजलों से माहौल को रसमय बना दिया। डॉ. निसार अहमद ने मोहब्बत के शाश्वत भाव को रेखांकित करते हुए पढ़ा— "क्या कभी तुमने भी किया है इश्क, मर्ज जिसकी नहीं दवा है इश्क।" वहीं दिनेश वशिष्ठ ने अपनी काव्य पंक्तियों से निश्छल प्रेम का सुंदर चित्र उकेरा।
- सकारात्मक हास्य और नवीन दृष्टिकोण: हास्य कवि राम पंडित ने अपनी सहज हास्य रचना से सभी को हंसने पर मजबूर कर दिया। कल्पना सिरौनिया ने अपनी मौलिक कल्पनाशीलता का परिचय देते हुए आधुनिक परिवेश पर सुंदर काव्य पंक्तियां प्रस्तुत कीं।
- मानवता और एकता का संदेश: राकेश भटनागर ने अपने सुप्रसिद्ध और प्रेरणादायक गीत "धरती बांटी, सागर बांटा, मत बांटो इंसान को" के माध्यम से समाज में विश्व बंधुत्व और आपसी प्रेम की अलख जगाई। राकेश मिश्रा ने अपनी कुंडलियों के माध्यम से वैष्णव धर्म के उच्च नैतिक मूल्यों और संस्कृति की महिमा बताई।
- जीवन दर्शन और जागरूकता: गीतकार गोविंद अनुज ने जीवन के अनमोल पलों का महत्व बताते हुए पढ़ा— "सुख के दो पल को भी आंगन में ठहरने दो..."। कवि बसंत श्रीवास्तव, अजय जैन एवं अजय जैन 'अविराम' ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से धर्म, सत्य, निष्ठा और सामाजिक मूल्यों की रक्षा का संदेश दिया।
काव्य गोष्ठी के समापन पर संघ के सचिव राजकुमार भारती ने सभी उपस्थित गणमान्य साहित्यकारों, अतिथियों एवं काव्य-प्रेमियों का हृदय से आभार व्यक्त किया।
