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एक प्रेरणादायक स्टोरी मदद करके देखो अच्छा लगता है

Tuesday, 23 June 2020

/ by Durgesh Gupta


शिवपुरी-दोस्तों नमस्कार आज मेरी यह कहानी आपसे सांझा करने का यह मकसद नहीं है कि मैं बताऊं कि मैंने आज एक नेक काम किया बस मकसद यह है कि अगर जिंदगी में कभी आपको किसी के काम आने का मौका मिले तो अवश्य उसके काम आए क्योंकि ईश्वर ने आपको उन चंद लोगों में से चुना है जो किसी की मदद कर पाए ईश्वर खुद इतना शक्तिशाली है कि वह खुद अपने सारे काम कर सकता है फिर भी अगर आपको उसने चुना है तो आप उसके चुने हुए काम को अवश्य करें
जब आज मैं फील्ड पर अपने काम से निकला तो मैंने इस तेज धूप में चलते एक आदमी को देखा जिसकी मोटरसाइकिल पर एक सिलेंडर बंधा था और वह थका हुआ असहाय अपनी मोटरसाइकिल को धक्का देकर उस घाटी को चढ़ने का प्रयास कर रहा था जब मैंने उससे पूछा कि क्या हुआ आपकी गाड़ी क्यों नहीं चल रही थी तब उसने मुस्कुराकर कहा कि भाई साहब पेट्रोल खत्म हो गया और मैं आगे बढ़ गया मैं सारी रास्ता बस यही सोचता रहा कि मैं उसकी मदद कैसे करूं जैसे ही पेट्रोल पंप आया तुम्हें तुरंत अपनी गाड़ी रोक कर पेट्रोल पंप पर गया क्योंकि मेरे पास खाली बोतल नहीं थी तो मैंने पेट्रोल पंप वाले से आग्रह किया कि अगर आपके पास कोई खाली बोतल है तो मुझे दे मैं थोड़ी देर में आपको लौटा दूंगा परंतु उसने मना कर दिया तब मैंने अपनी गाड़ी की डिग्गी में देखा तो मुझे एक खाली डब्बा मिल गया जिसमें मैंने पेट्रोल भरवा कर गाड़ी वापस ली पेट्रोल पंप  करीब उस  घाटी से 10 किलोमीटर की दूरी पर था मैंने बिना उस दूरी  और काम की परवाह किए उसको पेट्रोल देने वापस आया मेरी नजरें सारी रास्ता उस इंसान को ढूंढ रही थी कि कहीं उसने किसी आदमी की मदद लेकर तो पेट्रोल नहीं ले लिया यह आदमी कहीं और तो नहीं चला गया मैं सारी रास्ता उसको ढूंढते देखता रहा था मैं वही जगह पर आ गया था जहां मैंने उस इंसान को छोड़ा था और अब भी अपनी गाड़ी के साथ हफ्ता हुआ आ रहा था जिसकी गाड़ी में पीछे सिलेंडर बना हुआ था किसी ने भी उस परेशान इंसान की मदद करने कि जहमत नहीं उठाई  मैंने तुरंत गाड़ी रोककर उसे पेट्रोल देते हुए कहा कि भैया अपनी गाड़ी में पेट्रोल डालें  उस इंसान की हालत में आपको शब्दों में नहीं  समझा सकता वह इतना खुश हुआ इतना खुश कि वह कुछ बोल ही नहीं पाया बस मुस्कुराता ही रहा और दोनों हाथ जोड़कर खड़ा रहा कम से कम यह सिलसिला 2 मिनट चला मैं कुछ नहीं बोला बस धन्यवाद भाई साहब यह बोलते हुए उसकी आंखों में आंसू आ गए क्योंकि कोरोना महामारी के समय हमें सामाजिक दूरी का भी ध्यान रखना है इसलिए उस इंसान को मैं अपनी गाड़ी में लिफ्ट नहीं दे सका क्योंकि मैं नहीं जानता कि वह आदमी कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है इसलिए मैंने उस आदमी को बोला कि मैं आपको अपनी गाड़ी में लिफ्ट नहीं दे सका उसका मुझे अफसोस है पर मैं पेट्रोल पंप से जाकर आपकी गाड़ी में भरने के लिए पेट्रोल से आया हूं जिससे अब आप अपनी गाड़ी से जाएं दोस्तों जीवन में कभी किसी के काम आने का मौका मिले तो अवश्य आएं

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