राष्ट्रीय मीजल्स रूबेला वैक्सीन टीकाकरण अभियान के तहत मीडिया कार्यशाला सम्पन्न, जनजागरूकता लाने में मीडिया की अहम् भूमिका है: डॉ.ए.एल.शर्मा




शिवपुरी: राष्ट्रीय मीजल्स-रूबेला वैक्सीन टीकाकरण अभियान के तहत जिले के नौ माह से 15 वर्ष तक के 5 लाख 58 हजार 546 बच्चों को 15 जनवरी से 15 फरवरी 2019 के बीच टीकाकरण किया जायेगा। उक्ताशय की जानकारी मीजल्स(खसरा) रोग निर्मूलन एवं रूबेला रोग नियंत्रण एवं अभियान के प्रति जनसामान्य को जागरूक किए जाने हेतु सोमवार को आयोजित मीडिया कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.ए.एल.शर्मा द्वारा दी गई। 

जिला चिकित्सालय शिवपुरी के एएनएम ट्रेनिंग सेंटर आयोजित कार्यशाला में जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ.संजय ऋषिश्वर, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एन.एस.चौहान, डब्ल्यूएचओ के एसएमओ डॉ.बाला गणेशन, उपसंचालक जनसंपर्क श्री अनूप सिंह भारतीय, मीडिया अधिकारी श्रीमती विजयलक्ष्मी सहित मीडिया कर्मी उपस्थित थे। 

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय मीजल्स-रूबेला वैक्सीन टीकाकरण अभियान के प्रति जनजागरूकता लाने में मीडिया की अहम् भूमिका है, अतः मीडिया कर्मियों से अनुरोध है कि इस अभियान का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करें। जिससे नौ माह से लेकर 15 वर्ष तक का कोई भी बच्चा टीकाकरण से बंचित न रह सके। 

डॉ. संजय ऋषिश्वर ने बताया कि 15 जनवरी से 15 फरवरी 2019 तक चलने वाले इस टीकाकरण अभियान के तहत जिले के नौ माह से लेकर 15 वर्ष तक लगभग 5 लाख 58 हजार 546 बच्चों कवर होंगे। जिसमें 3 हजार 671 स्कूलों के 03 लाख 60 हजार 230 बच्चे और 02 हजार 408 आगनवाडी केन्द्रों के लगभग 01 लाख 98 हजार 316 बच्चे शामिल हैं। 

डॉ.गणेशन ने बताया कि मीजल्स रूबेला रोग से घबराने की कोई जरूरत नहीं है, 1985 से लेकर अभी तक करोड़ों बच्चों को टीका किया जा चुका है। 123 राष्ट्रों में इसी टीके से मीजल्स एवं रूबेला(एमआर) का सफाया किया जा चुका है।

ज्ञातव्य है कि भारत सरकार द्वारा लिये गये निर्णय के तहत वर्ष 2020 तक खसरा रोग निर्मूलन एवं रूबेला रोग नियंत्रण किया जाना है। देश में प्रतिवर्ष खसरा रोग से 49 हजार बच्चों की मृत्यु हो जाती है और 30 हजार बच्चे कन्जेनाइटल-रूबेला सिन्ड्रोम के साथ पैदा होते हैं, जो हमेशा के लिये परिवार व समाज के लिये परेशानी पैदा करते है। इसकी रोकथाम हेतु भारत शासन द्वारा वर्ष 2017 में 21 राज्यों में खसरा-रूबेला अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया गया था। प्रदेश में यह अभियान 15 जनवरी 2019 से शुरू किया जाएगा, जिसमें नौ माह से 15 वर्ष तक के समस्त बच्चों को खसरा-रूबेला (एम.आर वैक्सीन) लगाया जायेगा।  

रूबेला के लक्षण

रुबेला के लक्षणों में कम बुखार, मिचली और प्रमुख रूप से गुलाबी या लाल चकत्तों के निशान शामिल हैं, जो लगभग 50-80 प्रतिशत मामलों में उत्पन्न होते हैं। चकत्ते प्रायः चेहरे पर निकलते हैं, नीचे की ओर फैलते हैं और 1-3 दिनों तक रहते हैं। वायरस के संपर्क में आने के 2-3 दिनों के बाद चकत्ते निकलते हैं। चकत्ते निकलने के 1-5 दिनों तक की सर्वाधिक संक्रामक अवधि होती है। रुबेला विशिष्ट रूप से विकसित हो रहे भ्रूण के लिए खतरनाक होता है। 

वायरस वायुजनित श्वसन के छींटों द्वारा फैलता है। संक्रमित व्यक्ति रुबेला के चकत्तों के निकलने के एक हफ्ते पहले भी, और इसके पहली बार चकत्ते निकलने के एक हफ्ते बाद तक संक्रामक हो सकते हैं। (यह बहुत ही संक्रामक होता है जब चकत्ता पहली बार निकलता है।) सीआरएस के साथ जन्मे बच्चे एक वर्ष से अधिक समय तक दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं। रुबेला के मामले शीतऋतु के अंत में या बसंत के शुरुआत में अपने चरम पर होते हैं।

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