एमपी पर आर्थिक संकट और सूखे की मार ,फिर भी विधायकों की विदेश जाने की जिद



खेती के आधुनिक तरीके और विकास के कामों की जानकारी लेने के लिए मध्य प्रदेश के विधायकों को दल विदेश यात्रा पर जाएगा. दस से बारह दिन की होने वाली यात्रा में विधायकों के परिजन भी शामिल हो सकेंगे. लेकिन प्रदेश में सूखे के हालात और डावांडोल आर्थिक हालातों के बीच विधायकों की यात्रा पर बवाल उठ खड़ा हुआ है.


प्रदेश में किसान सूखे से परेशान है, व्यापारी जीएसटी की खामियों से उबर नहीं पा रहे है.लेकिन इन सबके बीच खेती की आधुनिक तकनीक को समझने के लिए प्रदेश के विधायक विदेश दौरे पर जाने की तैयारी में है.

इस साल के आखिरी में प्रस्तावित विधायकों की विदेश यात्रा दो-चार दिन की नहीं बल्कि दस से बारह दिन की होगी. इसमें लगभग तीस से ज्यादा विधायक शामिल होंगे. सिर्फ इतना ही नहीं यात्रा में अपने खर्च पर परिजन को ले जाने की भी छूट होगी. इस यात्रा का खाका लगभग तैयार हो चुका है. सिर्फ तय ये होना है कि विधायक अपना नॉलेज बढ़ाने के लिए किस देश की सैर करें.

यात्रा के पीछे तर्क ये भी 2010 के बाद विधायकों का दल किसी विदेश यात्रा पर नहीं गया है. ऐसे में अध्ययन दौरे के नाम पर इस बार विधायकों को विदेश यात्रा कराई जायें. बीजेपी यात्रा को लेकर उत्साहित है, तो प्रदेश के आर्थिक हालात और सूखे के मुद्दे पर सरकार को घेर रही कांग्रेस इस यात्रा को सुखद कैसे बताएं, तो विरोध जताया जा रहा है.

ऐसे में विधायकों की विदेश यात्रा को लेकर सवाल उठने लगे है. सवाल ये भी है कि क्या विदेशी टेक्निक के नाम पर होने वाली विदेश यात्रा से वाकई में प्रदेश को कोई बड़ा लाभ होगा, या फिर ये यात्रा भी सिर्फ सैर-सपाटा तक सीमित होकर रह जाएगी.

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