डीपीओ न होने से भगवान भरोसे महिला एवं बाल विकास विभाग, कैसे चलेगा दस्तक अभियान


जिले में चलना है 15 जून से दस्तक अभियान



शिवपुरी जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग में जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) का पद पिछले दो महीने से खाली है। डीपीओ रहीं ममता चतुर्वेदी का अप्रैल में जिले से ट्रांसफर हो गया तब से ही डीपीओ का पद खाली है। ट्रांसफर से पहले ममता चतुर्वेदी तीन महीने से छुट्टी पर थी। तीन महीने की छुट्टी से आने के बाद शासन द्वारा अप्रैल में इनका शिवपुरी से दूसरी जगह ट्रंासफर कर दिया गया।
कुपोषण प्रभावित शिवपुरी जिले में पिछले छह महीने से महिला एवं बाल विकास विभाग की हालत खराब है। डीपीओ का पद खाली होने से विभाग की सारी व्यवस्थाएं प्रभारी अधिकारी के भरोसे चल रही हैं। वर्तमान में डीपीओ का चार्ज जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी ओपी पांडे के हाथों में है लेकिन कोई स्थाई अधिकारी डीपीओ के पद पर तैनात न होने के कारण विभाग की व्यवस्थाएं सही ढंग से संचालित नहीं हो रही हैं। ऐसे में 15 जून से शुरू होने वाले दस्तक अभियान पर भी इसका असर पड़ने के आसार हैं। इस अभियान में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों की सघन जांच एवं उपचार किया जाना है। शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और महिला-बाल विकास विभाग संयुक्त रूप से यह अभियान चलाना है। 15 जून से 15 जुलाई दस्तक अभियान चलेगा। अभियान में जन्म से पांच वर्ष के सभी बच्चों में खून की कमी की जाँच, छ: माह से पाँच वर्ष तक के गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान 9 से पॉंच वर्ष के बच्चों को विटामिन ए का घोल, दस्त रोग, निमोनिया और जन्मजात बीमारियों से ग्रसित बच्चों की पहचान कर नि:शुल्क जांच-उपचार और परिवहन सेवा दी जाएंगी। लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग की इस समय हालत खराब होने से जमीनी स्तर पर यह अभियान सफल हो पाएगा कि नहीं यह देखने वाली बात होगी।
*डीपीओ की कुर्सी पर कईयों की नजर*
कुपोषण प्रभावित शिवपुरी जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के डीपीओ का पद खाली होने के बाद इस मलाईदार पोस्ट पर कई अधिकारियों की नजर है। वर्तमान में प्रभारी के तौर पर काम देख रहे जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी ओपीे पांडे ने ही अपने वरिष्ठ अधिकारियों से इसी पोस्ट पर तैनाती की बात रखी है। सूत्र बताते हैं कि इनकी तैनाती के लिए नोटशीट पर चली है। लेकिन इनकी शिवपुरी जिले में पिछले पांच साल से पोस्टिंग इनके आड़े आ रही है। वहीं ग्वालियर के एक पूर्व अधिकारी ने भी स्थानीय मंत्री कोटे से इस पद पर तैनाती चाही है।
*बिना अधिकारी के कैसे चल पाएगा अभियान*
शिवपुरी जिले में इस समय डीपीओ का पद खाली होने से अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों पर हालत खराब है। खासकर कुपोषण प्रभावित पोहरी, बैराड़, खनियांधाना, पिछोर, खोड़ में व्यवस्थाएं भगवान भरोसे हैं। जिले में दस एनआरसी संचालित हो रही हैं लेकिन यहां पर भर्ती कुपोषित बच्चों की संख्या गिनीचुनी ही हैं। पूर्व डीपीओ ममता चतुर्वेदी ने तो एक भी बार इन एनआरसी केंद्रों पर निरीक्षण अपने कार्यकाल में नहीं किया था। स्थाई डीपीओ न होने से कागजी में पोषण आहार वितरण हो रहा है और इस योजना में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है।

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