OMG -बच्चे नहीं हुए तो शिक्षिका ने लगाए बच्चो के रूप में 17 पौधे ,करती है सभी का पालन पोषण


                    हर साल एक वृक्ष लगाने का लिया संकल्प, अब तक लगा चुकी हैं 17 वृक्ष


शिवपुरी -हम आपको बताने जा रहे है शिक्षिका अनीता भगत के संकल्प के बारे में जिनकी शादी के कई साल गुजर जाने के बाद भी बच्चे नहीं हुए और काफी जगह इलाज कराने के बाद भी जब उनके यहा  बच्चे नहीं हुए तो अनीता ने फैसला किया  और संकल्प लिया  हर साल पौधे लगाउंगी और उनकी देखभाल भी अपने बच्चो की तरह करुँगी |
पत्रिका में छपी खबर के अनुसार बदरवास विकासखंड के ग्राम गुढ़ाल डांग प्रायमरी स्कूल में पदस्थ एक शिक्षिका के यहां जब बच्चे  नहीं हुए तो उन्होंने पेड़ों को अपना पुत्र मान लिया। उन्होंने संकल्प ले लिया कि वह हर साल एक पुत्र के जन्म के समान एक पौधा रोपेंगी और बच्चो  के समान उसकी देखभाल कर उसे पालेंगी। वे पिछले 17 साल से हर साल एक पौधा रोपती हैं और पुत्र समान देख भाल करती हैं। उनके इस संकल्प ने स्कूल को हरियाली से अ'छादित कर दिया है।
जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ निवासी अनीता भगत की पोस्टिंग वर्ष 1998 में गुढ़ाल डांग के प्राथमिक स्कूल में हुई थी। स्कूल में पोस्टिंग से एक साल पहले अनीता की शादी हो चुकी थी, लेकिन इलाज के बाद भी जब उनके बच्चे  नहीं हुए तो उन्होंने संकल्प लिया कि वह हर साल एक बचचे  को जन्म देने के समान एक पौधे का रोपण करेंगी तथा उस पौधे की देखभाल बचचो  के समान करेंगी। यह सिलसिला पिछले 17 सालों से चल रहा है। अब तक अनीता भगत स्कूल परिसर में 17 पौधे लगा चुकी हैं जो अब वृक्ष बन गए हैं। खास बात यह है कि इन वृक्षों और पौधों की देखभाल के लिए अनीता ने अपने घर परिवार सभी से नाता तोड़ दिया है। वह वर्ष 2000 के बाद अभी तक एक बार भी अपने घर छत्तीसगढ़ नहीं गई हैं, जबकि उनके पति एब्रोन तिर्की हर साल कई बार छत्तीसगढ़ जाते हैं। शिक्षिका अनीता भगत का कहना है कि यदि मेरी कोख से कोई पुत्र जन्म लेता तो शायद वह हर किसी के काम नहीं आता, परंतु मेरे इन 17 पुत्रों द्वारा छोड़ी जाने वाली ऑक्सीजन से समाज का हर व्यक्ति जीवित है। मेरे लिए इससे अधिक फक्र की बात क्या हो सकती है कि मेरे ये पुत्र सदियों तक समाज के काम आएंगे। उनका कहना है कि लोग पुत्र की इ'छा सिर्फ इसलिए करते हैं ताकि उनका वंश आगे बढ़ सके और लोग उनके नाम को याद रखें। लेकिन इन वृक्षों के कारण लोग मुझे सदियों तक याद रखेंगे और कहेंगे कि ये अनीता भगत के पुत्र हैं।
&यह बात सही है कि शिक्षिका ने यह संकल्प लिया कि वह हर साल एक पौधा रोपेंगी और उसका पुत्र के समान पालन पोषण करेंगी। यह सिलसिला पिछले 17 साल से चल रहा है। इन पेड़ों की देखभाल की खातिर अनीता मैडम अपने घर छत्तीसगढ़ नहीं जाती हैं।
अमर सिंह पटेरिया, जनपद सदस्य

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