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कृषि मेला पहले ही दिन फ़ैल , अफसरों का भ्र्ष्टाचार उजागर

Friday, 12 May 2017

/ by Durgesh Gupta

पहले ही दिन फेल हो गया कृषि मेला, 20 लाख का बजट लगा दिया ठिकाने
बसों में लाए गए किसान भोजन और पानी को तरसते नजर आए
कृषि विभाग के अफसरों का भ्रष्टाचार


शिवपुरी।

बैराड़ कृषि उपज मंडी में शुक्रवार को आयोजित किया गया कृषि विज्ञान मेला अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गया। यहां पर गर्मी के बीच प्रशासनिक बदइंतजामी के कारण किसान भोजन और पानी के लिए तरसते देखे गए। अव्यवस्था इस कदर रही कि पंडाल में आधी से ज्यादा कुर्सियां खाली रहीं। जिन किसानों को बसों में विभिन्न योजनाओं का लाभ देने के बहाने बैराड़ लाया गया वह कृषि विभाग के अफसरों की  भ्रष्ट कार्यशैली के कारण परेशान होते रहे। तीन दिनों तक चलने वाला यह कृषि मेला पहले ही दिन फेल रहा। किसानों को सुबह 10 बजे से ही आयोजन स्थल पर बुला लिया गया था लेकिन केंद्रीय पंचायत एवं विकास मंत्री नरेंद्रसिंह तोमर डेढ़ बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। केंद्रीय मंत्री के देर से पहुंचने के कारण प्रदेश के कृषि मंत्री गौरीशंकर विसेन पहले ही मंच पर पहुंच गए और उन्हें दतिया में आयोजित कृषि मेले में शामिल होना तो उन्होंने मुख्य अतिथि नरेंद्र सिंह तोमर के आने से पहले ही मंच से बोलना शुरू कर दिया। पंडाल में आधी से ज्यादा कुर्सियां खाली होने के कारण नाराज से दिखे मंत्री विसेन ने मेले में स्टॉल के अंदर बैठे लोगों को भी मंच से आवाज देकर बुलवाया। गर्मी के बीच अव्यवस्था के कारण किसान परेशान देखे गए। दतिया में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आने से प्रदेश के कृषि मंत्री गौरीशंकर विसेन अपना भाषण देने के बाद केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को मंच पर ही छोड़कर चले गए।

20 लाख का बजट लगा दिया ठिकाने

कृषि विकास एवं कृषि विस्तार सुधार कार्यक्रम (आत्मा परियोजना) के तहत कृषि विभाग को 20 लाख रुपए का बजट कृषि महोत्सव के लिए मिला था। इस बजट से जिले में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि महोत्सव, कृषि रथ व किसान संगोष्ठियां आयोजित होनी थीं लेकिन भ्रष्ट अफसरों ने इस बजट में सेंध लगा दी। इस बजट में आर्थिक अनियमितताओं का मामला भी सामने आया है। बताया जाता है कि आनन-फानन में दिखावटी टेंडर प्रक्रिया अपना कर दो ठेकेदारों को सारा काम दिया गया। कृषि महोत्सव में जो रथ गांव-गांव जाना बताया गया उसमें 8 लाख का बजट का पेमेंट खटारा वाहनों के नाम पर किया जा रहा है। जबकि एलसीडी वाले कृषि रथ चलाए जाने थे। इसी प्रकार शुक्रवार को बैराड़ में बसों से किसानों को लाने, भोजन और अन्य स्टॉल लगाने के नाम पर भी कागजी आयोजन दिखा इस बजट को ठिकाने लगाया गया है।

क्या कहते हैं अधिकारी

गर्मी के कारण कुछ कमियां रहीं फिर भी हमने किसानों को परेशानी नहीं होनी दी। पंडाल में पानी और भोजन की व्यवस्था थी। प्रदेश शासन से जो बजट मिला था वह नियमानुसार ही खर्च किया है।

आरएस शाक्यवार

उपसंचालक कृषि विभाग, शिवपुरी 

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