इंदौर में भी बन सकती है।, होशंगाबाद की तरह खुली जेल

होशंगाबाद में इस तरह बनी है खुली जेलजेल मुख्यालय ने होशंगाबाद में चल रही ओपन जेल की तर्ज पर प्रदेश की अन्य जेलों में भी इस तरह का प्रयोग करने के लिए सभी सेंट्रल जेल को पत्र लिखा है, लेकिन इंदौर जेल प्रशासन ने ओपन जेल के लिए आवश्यक जगह नहीं होने की बात कही है। हालांकि अधिकारी चुनिंदा कैदियों को काम के लिए बाहर भेजने को तैयार हैं।


इंदौर -

सेंट्रल जेल के अधीक्षक आरसी आर्य ने बताया कि जेल शहर के बीच में है। यहां जगह की कमी पहले से है। इसलिए यहां खुली जेल के लिए संभावना नहीं है। सांवेर रोड स्थित नई जेल बनने के बाद इस प्रस्ताव पर काम किया जा सकता है। हमने मुख्यालय को इसकी जानकारी दे दी है और यह भी कहा है कि अच्छे व्यवहार वाले कुछ कैदियों को काम के लिए रोजाना बाहर भेजा जा सकता है।
ऐसी है होशंगाबाद की जेल जेल विभाग ने पांच साल पहले होशंगाबाद में 17 एकड़ में 32 करोड़ रुपए की लागत से प्रदेश की पहली खुली जेल बनाई थी। यहां 25 कैदियों के रहने के लिए आवास बनाए गए हैं। कैदी आवास में अपने परिवार के साथ रहते हैं और दिनभर शहर में अपना कामकाज कर शाम को लौट आते हैं। इसके लिए ऐसे कैदियों का चयन किया गया है जो आदतन अपराधी नहीं हैं।
इसके पीछे की योजनाविभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जेल में रहकर कैदी समाज की मुख्य धारा से कट जाता है। जेल से बाहर आने के बाद उस पर समाज में रहकर जीवन यापन करने में कठिनाई होती है। इसलिए सजा के आखिरी के एक-दो साल के लिए उन्हें खुली जेल में रखा जाए, जिससे दिक्कत नहीं हो।
तिहाड़ में भी लागू है यह योजनादिल्ली की तिहाड़ जेल में भी इस योजना को लागू किया गया है, जिसमें वहां के कैदी बाहर जाकर काम करते हैं और शाम को वापस लौट आते हैं। पहले चरण में वहां के 6 कैदियों को इस तरह का मौका दिया गया था।

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