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प्रभारी कलेक्टर नेहा मारव्या की तानाशाही के खिलाफ कल से धरने पर बैठेंगे पत्रकार

Monday, 30 January 2017

/ by Durgesh Gupta

शिवपुरी। शिवपुरी की प्रभारी कलेक्टर नेहा सिंह मारव्या के तानाशाही एवं दमनात्मकपूर्ण रवैए के खिलाफ अब सभी पत्रकार संगठनों ने एकजुटता दिखाते हुए इस आंदोलन के लिए संयुक्त मोर्चा बना लिया है। अब इस संयुक्त मोर्चा के बैनर तले पत्रकार 31 जनवरी से कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। 
अब पत्रकारों ने नेहा मारव्या के खिलाफ चल रहे आंदोलन को तेज करते हुए मध्यप्रदेश शासन से उनसे कलेक्टर का प्रभार वापस लेने की मांग की है। संयुक्त मोर्चा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 13 जनवरी को प्रभारी कलेक्टर के रूप में कमान संभालने वाली नेहा मारव्या लगातार पत्रकारों के खिलाफ दमनात्मकपूर्ण आदेश निकाल रहीं हैं। 
सर्वप्रथम प्रभारी कलेक्टर द्वारा पत्रकारों को जनसुनवाई में प्रतिबंधित करने का फरमान सुनाया गया उसके बाद गणतंत्र दिवस समारोह की कवरेज के लिए अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न की गईं और हाल ही में उन्होंने पत्रकारों के लिए जिला चिकित्सालय में प्रवेश पर भी तमाम नियम कायदे लगाते हुए अघोषित प्रतिबंध सा लगा दिया है जिसके खिलाफ शिवपुरी जिले के समूचे पत्रकार एकजुट होकर उनके खिलाफ 25 जनवरी से आंदोलन करते आ रहे हैं। 
आंदोलन के प्रथम चरण में पत्रकारों ने 26 जनवरी पर जिला मुख्यालय सहित सभी तहसीलों में आयोजित मुख्य समारोह में भागीदारी नहीं की, बल्कि तात्याटोपे के शहीद स्थल पर गणतंत्र दिवस मनाया। साथ ही पत्रकारों ने उक्त शासकीय आयोजन की कवरेज भी नहीं की और न ही उसे प्रकाशित किया। आंदोलन के अगले चरण में पत्रकारों ने निर्णय लिया कि पत्रकार शासकीय प्रेसनोटों का बहिष्कार करेंगे। 
इसी बीच प्रभारी कलेक्टर ने एक नया फरमान सुनाते हुए पत्रकारों के जिला चिकित्सालय में भी प्रवेश पर अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न कर दीं। मजबूरन आज पत्रकारों को एक बार फिर एकजुट होना पड़ा और संयुक्त मोर्चे का गठन करते हुए पत्रकारों ने अब कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर अनिश्चितकालीन धरने का मन बना लिया है जिस संबंध में पत्रकारों ने आज अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और पुलिस अधीक्षक शिवपुरी को एक सूचना भी प्रेषित कर दी जिसमें उन्होंने 31 जनवरी से अनिश्चितकालीन धरने की बात कही है। इस आंदोलन को समूचे जिले के पत्रकारों के साथ-साथ तमाम अन्य संगठनों का समर्थन भी प्राप्त होता दिखाई दे रहा है। 
अनावश्यक जिद में आंदोलन हुआ तेज
प्रभारी कलेक्टर नेहा सिंह मारव्या की अनावश्यक जिद में पत्रकारों के इस आंदोलन ने न सिर्फ पत्रकारों को एकजुट कर दिया, बल्कि उनके हिटलरशाही रवैए के कारण आंदोलन और भी तेज हो गया। बीते दो दशकों से भी अधिक समय में ऐसा पहली बार देखने में आ रहा है कि पत्रकार इतनी बड़ी संख्या में एकजुट हुए हैं। 
पत्रकारों की प्रथम चरण में मांग सिर्फ इतनी थी कि प्रभारी कलेक्टर कलेक्ट्रेट अथवा जिला पंचायत कार्यालय से अलग सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा कर खेद प्रकट करे और आगे से पत्रकारों के खिलाफ इस तरह की कोई प्रतिबंधात्मक कार्यवाही न करें, लेकिन उनकी अनावश्यक की जिद ने आंदोलन को गति प्रदान कर दी।

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