30 दिन–30 कार्यशाला अभियान की 27वीं कार्यशाला सर्किल जेल शिवपुरी में सम्पन्न
शिवपुरी। आनंद विभाग जिला शिवपुरी द्वारा सितंबर माह में चलाए जा रहे ‘30 दिन–30 कार्यशाला अभियान’ के अंतर्गत 27वीं कार्यशाला सर्किल जेल शिवपुरी में आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को अपने जीवन, मूल्यों, रिश्तों और आनंद को लेकर आत्मचिंतन का अवसर देना रहा।
कार्यशाला का शुभारंभ जिला संपर्क व्यक्ति अभय कुमार जैन एवं मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित द्वारा ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ प्रार्थना के साथ किया गया।
कार्यशाला के सत्र में आनंदम सहयोगी गरिमा दुबे ने प्रतिभागियों को अपने जीवन के आनंद को पहचानने तथा आनंद के बढ़ने और घटने के कारणों पर विचार कराया। उन्होंने ‘अल्पविराम’ के माध्यम से स्वयं के जीवन को देखने और परिस्थितियों के बीच स्वयं को निरंतर आनंदित रखने के विभिन्न पहलुओं पर संवाद किया।
इसके बाद आनंदम सहयोगी सुषमा कन्नौजिया ने प्रतिभागियों को ‘जीवन का लेखा-जोखा’ तैयार कराया। इस गतिविधि के माध्यम से प्रतिभागियों ने नि:स्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करना और दूसरों से मदद मिलना, दुख-सुख, कृतज्ञता जैसे जीवन-मूल्यों को ध्यान में रखते हुए अपने जीवन को लाभ-हानि के रूप में देखा और स्वयं के अनुभवों पर चिंतन किया।
अगले सत्र में आनंदम सहयोगी ऋषि सेन ने जीवन में रिश्तों के महत्व पर संवाद करते हुए रिश्तों के मधुर होने और उनमें दूरी आने के कारणों पर प्रतिभागियों को ‘अल्पविराम’ के माध्यम से विचार करने का अवसर दिया। उन्होंने बताया कि स्वयं के व्यवहार और दृष्टिकोण को समझकर रिश्तों में आई दूरी को कम करने की दिशा में प्रयास किया जा सकता है।
रिश्तों के सत्र में आनंदम सहयोगी पुष्पेंद्र लोधी ने ‘रिश्तों का मैप’ प्रतिभागियों के साथ साझा किया तथा अल्पविराम के माध्यम से जीवन में रिश्तों को समझने और उनमें आए सकारात्मक बदलावों से जुड़े अनुभव साझा किए।
कार्यशाला के अंत में आनंदम सहयोगी बृजेश सिंह तोमर ने प्रतिभागियों से फीडबैक प्राप्त किया। प्रतिभागियों ने कार्यशाला के विभिन्न सत्रों के माध्यम से स्वयं के जीवन, आनंद, मूल्यों और रिश्तों को नए दृष्टिकोण से देखने के अनुभव साझा किए।

