‘अल्पविराम’ ने सिखाया—समस्या से भागें नहीं, समाधान की पहल खुद करें

 



*30 दिन–30 कार्यशालाएं अभियान की 18वीं कार्यशाला आईटीआई शिवपुरी में सम्पन्न*



शिवपुरी। आनंद विभाग जिला शिवपुरी द्वारा सितंबर माह में आयोजित ‘30 दिन–30 कार्यशालाएं’ अभियान के अंतर्गत 18वीं कार्यशाला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) शिवपुरी में आयोजित की गई। कार्यशाला में प्रतिभागियों को अल्पविराम के माध्यम से स्वयं को समझने, जीवन की समस्याओं पर विचार करने और सकारात्मक बदलाव की दिशा में स्वयं पहल करने के लिए प्रेरित किया गया।



कार्यशाला का शुभारंभ आईटीआई के संस्था प्राचार्य हेमंत दंडौतिया एवं आनंद विभाग के जिला संपर्क व्यक्ति अभय कुमार जैन की उपस्थिति में ‘दयाकर दान विद्या का’ प्रार्थना के साथ हुआ। इसके बाद राजेश पटेल ने आनंद संस्थान का परिचय देते हुए संस्थान की अवधारणा और उद्देश्य से प्रतिभागियों को अवगत कराया।


प्रथम सत्र में मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित ने ‘समस्या और समाधान’ विषय पर अल्पविराम कराया। उन्होंने प्रतिभागियों को अपनी समस्याओं को देखने के साथ यह विचार करने के लिए प्रेरित किया कि समस्या के समाधान की जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों को बदलने की शुरुआत दूसरों से नहीं, बल्कि स्वयं से पहल करने और अपने भीतर झांकने से होती है।


अगले सत्र में एम. टोंगपांग ने प्रतिभागियों को अल्पविराम के माध्यम से स्वयं के भीतर झांकने का अवसर दिया। उन्होंने पवित्रता, निःस्वार्थता, ईमानदारी और प्रेम जैसे नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में जांचने और उनके प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया।


‘सीसीडी’ सत्र में प्रीति तिवारी ने प्रतिभागियों को कनेक्शन, करेक्शन और डायरेक्शन की अवधारणा समझाते हुए स्वयं से जुड़ने, स्वयं में आवश्यक सुधार करने और जीवन को सही दिशा देने की बात कही।


‘फ्रीडम ग्लास’ सत्र में प्रमोद रावत ने प्रतिभागियों को अपने जीवन रूपी ग्लास में अल्पविराम के माध्यम से झांकने के लिए प्रेरित किया। प्रतिभागियों ने अपनी कमियों और बुराइयों को पहचानने तथा नियमित अभ्यास के माध्यम से उनमें बदलाव लाने की प्रक्रिया को समझा।


समापन सत्र में तीन दिवसीय अल्पविराम कार्यशाला से अपने जीवन में आए परिवर्तनों के अनुभव राजीव पुरोहित, नमित मिश्रा, अजय भार्गव एवं नितिन भार्गव ने प्रतिभागियों के साथ साझा किए। उनके अनुभवों ने प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर दिया कि स्वयं के साथ कुछ समय रुककर संवाद करना जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत बन सकता है।

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