*‘30 दिन–30 कार्यशालाएं’ अभियान की छठवीं कार्यशाला में आनंद, रिश्ते और जीवन-संतुलन पर हुआ आत्ममंथन*
शिवपुरी। दिनभर खबरों की तलाश, घटनाओं की भागदौड़ और समाज के सवालों के बीच पत्रकारों ने रविवार को कुछ पल स्वयं के लिए निकाले। ‘30 दिन–30 कार्यशालाएं’ अभियान के तहत राज्य आनंद संस्थान, जिला शिवपुरी द्वारा पत्रकार साथियों के लिए आयोजित छठवीं ‘अल्पविराम परिचय कार्यशाला’ में प्रतिभागियों ने स्वयं से जुड़ने, जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और रिश्तों को बेहतर बनाने की दिशा में आत्ममंथन किया।
कार्यशाला की शुरुआत आनंदम सहयोगी अवध प्रताप सिंह चौहान ने राज्य आनंद संस्थान के परिचय सत्र से की। उन्होंने बताया कि संस्थान की स्थापना वर्ष 2016 में हुई और इसका उद्देश्य व्यक्ति के जीवन में आनंद, संतुलन एवं सकारात्मकता को बढ़ावा देना है। उन्होंने संस्थान की गतिविधियों एवं उद्देश्यों की जानकारी प्रतिभागियों को दी।
‘आनंद की ओर’ सत्र में प्रीति तिवारी ने प्रतिभागियों से समस्या और समाधान पर संवाद किया। उन्होंने अल्पविराम के माध्यम से अपनी समस्याओं के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को पहचानने तथा समाधान की दिशा में स्वयं की भूमिका को समझने का प्रयास कराया।
इसके बाद प्रमोद तिवारी ने ‘CCD—कनेक्शन, करेक्शन और डायरेक्शन’ सत्र में स्वयं से जुड़ने, स्वयं में सुधार करने और जीवन को सही दिशा देने की प्रक्रिया समझाई। इस दौरान पवित्रता, प्रेम, ईमानदारी और निःस्वार्थता जैसे जीवन मूल्यों पर चर्चा हुई।
मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित ने ‘फ्रीडम ग्लास’ गतिविधि के माध्यम से प्रतिभागियों को स्वयं से कनेक्शन, करेक्शन और डायरेक्शन के बाद जीवन में आए बदलावों पर चिंतन कराया। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि स्वयं से संवाद करने और अपने भीतर झांकने से जीवन में नई दिशा मिल सकती है।
‘रिश्ते’ सत्र में प्रीति तिवारी ने रिश्तों के जुड़ने और टूटने के कारणों पर संवाद किया। प्रतिभागियों ने जाना कि संवाद, समझ, क्षमा और आत्मचिंतन के माध्यम से रिश्तों में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
आनंदम सहयोगी ब्रजेश सिंह तोमर ने ‘लाइफ बैलेंस शीट’ गतिविधि के माध्यम से प्रतिभागियों को जीवन के विभिन्न पहलुओं का आत्ममूल्यांकन कराया। मदद, कृतज्ञता, दुःख और क्षमा जैसे भावों को चार प्रश्नों के माध्यम से समझाते हुए उन्होंने जीवन को संतुलित करने और अल्पविराम को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की दिशा में अभ्यास कराया।
कार्यशाला के समापन सत्र में आनंदम सहयोगी ऋषि सेन, पुष्पेंद्र लोधी, गरिमा दुवे एवं उदय सिंह ने अपने तीन दिवसीय अल्पविराम कार्यशाला के सकारात्मक अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि अल्पविराम के अभ्यास ने उन्हें स्वयं को समझने, भावनाओं को पहचानने तथा जीवन और रिश्तों को नए दृष्टिकोण से देखने में मदद की।
कार्यशाला ने पत्रकार साथियों को यह संदेश दिया कि दूसरों की खबरों के बीच कभी-कभी अपने भीतर की खबर पढ़ना भी जरूरी है। जीवन की भागदौड़ में लिया गया छोटा-सा ‘अल्पविराम’ स्वयं से जुड़ने और जीवन को नई दिशा देने का अवसर बन सकता है।




