शिवपुरी शहर में इन दिनों जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी जलावर्धन योजना और सीवर प्रोजेक्ट पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। शहरवासियों का आरोप है कि दोनों योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी हैं और धरातल पर जनता को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
एक ओर “पेरिस जैसी सड़कें” बनाने के दावे किए गए, वहीं दूसरी ओर पोहरी की सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। नागरिक जान जोखिम में डालकर टूटी सड़कों पर सफर करने को मजबूर हैं। बरसात और गर्मी दोनों मौसमों में हालात और बदतर हो जाते हैं।
शहर में पेयजल संकट भी गंभीर रूप ले चुका है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों तक को पानी की कट्टियां लेकर इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में कुछ लोग नाले जैसे गंदे पानी को पीने के लिए मजबूर दिखाई दे रहे हैं, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। हालांकि वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन जनता के आक्रोश ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इधर दूध संकट ने भी आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दूधिया हड़ताल के चलते लोगों को मनमाने दामों पर नकली और मिलावटी दूध खरीदने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों और बुजुर्गों वाले परिवारों को हो रही है।
नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। कई पार्षद खुलकर जिला प्रशासन और नगरपालिका व्यवस्था के खिलाफ नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। कुछ पार्षदों द्वारा जिला कलेक्टर को अपने इस्तीफे देने की मांग भी उठाई जा चुकी है। जनता का कहना है कि शिकायतों और बैठकों के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा।
अब शहर में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर शिवपुरी की जनता कब तक पानी, सड़क, बिजली और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसती रहेगी? जनप्रतिनिधियों—विधायक, नगरपालिका अध्यक्षा और सांसद—से जवाब मांगा जा रहा है कि विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच आम जनता की परेशानियां कब दूर होंगी।
शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो जनता का आक्रोश बड़ा आंदोलन का रूप ले सकता है।
