विश्व आदिवासी दिवस से एक दिन पूर्व आदिवासियों के साथ बर्बरता


-मायापुर थाने के ग्राम मानकपुर में दबंगों ने आदिवासी को किया पीट पीटकर अधमरा

-सहरिया क्रांति ने की दबंगों पर कार्यवाही की माँग, नहीं तो होगा आंदोलन

शिवपुरी। आज 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस है और आज के दिन विश्वभर में आदिवासियों के उत्थान हेतु शपथ ली जाती है, कसमें खाई जाती हैं मगर क्या वास्तव में आदिवासियों की दशा सुधरी तो इसका जबाव लेने के लिए हमें शिवपुरी जिले के आदिवासी बसाहटों की ओर रुख करना पड़ेगा वहां मालूम चलेगा कि आजादी के 70 साल बाद भी आदिवासी किस तरह शोषण का शिकार हो रहा है और उसके साथ आए दिन अमानुषिक अत्याचार हो रहे हैं।

आदिवासियों के शोषण को उजागर करने वाला ऐसा ही मामला बीते रोज शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा अंतर्गत मायापुर थाने के ग्राम मानकपुर से सामने आया है जहाँ आधा दर्जन दबंग ठाकुरों ने एक आदिवासी युवक को घर से बुलाकर उसके साथ जमकर मारपीट कर दी जिससे वह लहूलुहान हो गया। पीडि़त आदिवासी ने तत्काल मायापुर थाने की पुलिस को सूचना दी मगर पुलिस ने आरोपियों के दबाव के चलते गरीब आदिवासी की कोई सुनवाई नहीं की।

मारपीट का शिकार आदिवासी अपने परिवार सहित  सहरिया क्रांति के संयोजक  संजय बेचैन के पास आया एवं  मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी। संजय बेचैन ने आदिवासियों के साथ घटित हुई घटना से पुलिस को अवगत कराया और दबंगों पर कड़ी कार्यवाही हेतु आवेदन सौंपा, उन्होंने बताया कि यदि इस मामले में दबंगों पर कार्यवाही नहंी की गई तो सहरिया क्रांति सडक़ों पर उतरकर आंदोलन करेगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मायापुर थाना क्षेत्र के ग्राम मानकपुर में लालाराम पुत्र पहलवान आदिवासी जब अपने घर पर था तभी उसके घर पर 7 अगस्त की शाम 6 बजे जितेन्द्र चौहान, बॉबीराजा चौहान, त्रिलोक सिंह ठाकुर और इनके साथ दो तीन अन्य साथी आ गए।

 दबंगों ने लालाराम को घर से बाहर बुलाया और उसे एकांत में लेकर जाकर उसके साथ जमकर मारपीट कर डाली। इस दौरान जितेन्द्र चौहान ने लालाराम में लाठियों से वार किया, बॉबीराजा और त्रिलोक ने लात घूसों से उसे बुरी तरह पीट दिया। इस मारपीट में लालाराम आदिवासी के मुंह से खून आ गया और उसके शरीर में अन्य जगहों पर मूूंदी चोटेें भी आईं हैं। जाते जाते आरोपी लालाराम को धमकी दे गए कि पुलिस में शिकायत की तो तूझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे।
लालाराम आदिवासी ने मायापुर थाने की डायल 100 को फोन किया तो वहां से भी उसे कोई सहायता नहीं मिली। आरोपी गणों ने लालाराम आदिवासी को गांव से बाहर निकलने नहीं दिया जा रहा था मगर वह छिपते छिपाते आज 8 अगस्त को सहरिया क्रांति के कार्यालय पर शिवपुरी पहुंचा जहाँ उसने पूरी घटना की जानकारी दी।

लालाराम आदिवासी के परिजनों ने सहरिया क्रांति संचालक संजय बेचैन के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर आवेदन सौंपा और आरोपियों पर कड़ी कार्यवाही की माँग की।

लालाराम आदिवासी ने बताया कि आरोपीगण राजनैतिक रसूख वाले हैं इसलिए पुलिस उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करती और यदि वह शिवपुरी से लौटकर अपने गांव गया तो उसे जान से मार दिया जाएगा, इसलिए पुलिस उनके खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें तत्काल गिरफ्तार करे।

अब यहां सवाल यह उठता है कि वर्ष भर आदिवासियों के उत्थान के दावे सरकार द्वारा किए जाते हैं और 9 अगस्त को आदिवासी दिवस पर पूरे विश्व में आदिवासियों की उन्नति की कसमें खाई जाती हैं मगर आदिवासियों की ऐसी हालत को देखकर कहा जा सकता है कि आदिवासियों के नाम आदिवासी दिवस पर होने वाली रस्म अदायगी महज एक ढोंग है इसका धरातल पर कोई असर नहीं हो रहा। सहरिया क्रांति संयोजक संजय बेचैन का कहना है कि जिले में आदिवासियों पर हमले बढ़ना चिंताजनक है।

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