Latest

latest

लावारिस शहर -26- सरकारी कंधो के सहारे चुनावी मोहरे बिछाने "शिवराज जी", पधारो म्हारे गांव......?????

Wednesday, 6 December 2017

/ by Durgesh Gupta


(भावन्तर योजना को मोहरा बनाकर किसान महासम्मेलन के बहाने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह के बदरबास दौरे पर विशेष.....)
✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍

डम-डम-डम-डम

स्वागत-वंदन-अभिनंदन.....,
शिवराज सिंह जी, पधारो म्हारे गांव...?

बरबाद फसलो के बाद रोते- बिलखते नासमझ किसानों की छाती पर साँप लौटती हुई
 "व्यापारी हितेषी" भावान्तर योजना का यश गान महज़ "डेढ घंटे" सुनाने के लिये  "डेढ करोड़" का मंच भी बनकर है तैयार .....
स्वागत-वंदन-अभिनंदन.....
शिवराज जी,पधारो,म्हारे गांव...….!

"सिंधिया" जी की कोलारस में हालिया हुई व्यापक 'जन-बल' बाली आमसभा के बाद भाजपाइयों के चेहरे का उड़ा हुआ नूर लौटाने
अन्य विधानसभा क्षेत्रों तक से
सरकारी मशीनरी के दम पर
"धन-पद बल " पर ढोकर लाये जाने बाले विशुद्ध किसान ( पुश्तेनी अथवा नव रूपांतरित) "चाहे-अनचाहे" आने को है तैयार ......
स्वागत-वंदन-अभिनंदन.....
शिवराज जी,पधारो,म्हारे गांव......!

हमे याद है, पहले भी आये थे करुनानिधान, "आप".....
तब नही थे चुनाव....
ओर किये थे घोषणाओं के कई वार....
जिन पर भोली-भाली जनता ने खूब पकाए थे "खयाली पुलाव"
अब, समय"मत-दाता वंदन" का है   ओर "चुनावी मंथन" में...
 उप चुनाव की बह रही है हिलोरे
जिन पर ,अपने मंतव्य को साधने...,
"सिंधिया"को डुबाने,तुम कुशल नाविक की तरह
सरकारी खर्च पर जमकर चलाओगे
"चुनावी नाव..." (पूर्ण पारंगत )
लाव-लश्कर है तैयार ......
स्वागत -वंदन-अभिनंदन...
शिवराज जी, पधारो म्हारे गांव....!
डम-डम-डम....
पधारो म्हारे गाँव......!!!

बिल्ली के भाग से छीका टूटा है
ओर कोतबाल भी सैय्या है,सो
लड़ ही लो नूरा- कुश्ती
न हर्र लगेगी,ओर न फिटकरी....
रंग भी आएगा चोखा- चोखा....
जनता को तो खाना ही है
धोखा-धोखा-धोखा.....
फिर कर डालो बार...,
सब कुछ है तैयार......
मुफ़त का चंदन,घिस मेरे नंदन...
स्वागत-वंदन-अभिनंदन...
शिवराज जी,पधारो म्हारे गांव.....!!!
शिवराज जी,पधारो म्हारे गांव...!!!

खुदा खेर करे....!
खुद खेर करे.....!!

✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍
नाचीज- बृजेश सिंह तोमर
www.khabaraajkal.com
✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍
नोट- कलमकार विधायक रामसिंह यादव जी के आकस्मिक अवसान के उपरांत रिक्त हुई कोलारस विधान सभा सीट पर चल रही चुनावी नूरा कुश्तियों के बीच जनता के खून -पसीने की गाढ़ी कमाई को हुक्मरानों द्वारा धुंए के छल्लो में इस तरह उड़ाये जाने से व्यथित है....! काश...,यू उपहास उड़ाने के बजाय बेबसी से मुँह तकते अन्नदाताओं को सुख से जीने का जरिया ही मुहैय्या हो जाता.....!!खेर, खुदा खेर करे.....!!!
✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍

No comments

Post a comment

Don't Miss
© all rights reserved
made with by templateszoo