जानिए -रजनीश से बन गए ओशो का, म प्र में हुआ था जन्म



11 दिसंबर को ओशो का जन्मदिन है। इस अवसर पर, कि ओशा के जन्म से लेकर मृत्यु तक की वह प्रमुख घटनाएं, जिसकी वजह से छोटे से गांव में पैदा हुआ एक साधारण बालक दुनिया का चर्चित शख्स बना। एक समय ओशो के पास 93 राल्स रायल कारों का जखीरा था और विश्व भर में उनके अनुयायी थे।
जबलपुर.11 दिसंबर को ओशो का जन्मदिन था। इस अवसर पर, ओशो के जन्म से लेकर मृत्यु तक की वे सभी प्रमुख घटनाएं, जिनकी वजह से छोटे से गांव में पैदा हुआ एक साधारण लड़का दुनिया का चर्चित शख्स बना। एक समय ओशो के पास 93 राॅल्स रायल कारों का जखीरा था और विश्व भर में उनके अनुयायी थे।
एक नजर ओशो पर...
ओशो रजनीशका जन्म मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के कुचवाड़ा गांव में हुआ था। ओशो शब्द लैटिन भाषा के शब्द ओशोनिक से लिया गया है, जिसका अर्थ है सागर में विलीन हो जाना। 1960 के दशक में वे 'आचार्य रजनीश' के नाम से एवं 1970-80 के दशक में भगवान श्री रजनीश नाम से और ओशो 1989 के समय से जाने गए।
फिलॉसफी के टीचर थे ओशो
ओशो फिलॉसफी के टीचर थे। उनके द्वारा समाजवाद, महात्मा गांधी की विचारधारा तथा संस्थागत धर्म पर की गई अलोचनाओं ने उन्हें विवादास्पद बना दिया। वे काम के प्रति स्वतंत्र दृष्टिकोण के भी हिमायती थे, जिसकी वजह से उन्हें कई भारतीय और फिर विदेशी मैग्जीन में 'सेक्स गुरु' के नाम से भी लिखा गया।
मुंबई में बनाया शिष्यों का ग्रुप
1970 में ओशो कुछ समय के लिए मुंबई में रुके और उन्होंने अपने शिष्यों को 'नव संन्यास' की शिक्षा दी और अध्यात्मिक मार्गदर्शक की तरह कार्य प्रारंभ किया। अपनी देशनाओं में उन्होंने पूरे विश्व के रहस्यवादियों, फिलॉसफर और धार्मिक विचारधाराओं को नया अर्थ दिया। 1974 में 'पूना' आने के बाद उन्होनें अपने 'आश्रम' की स्थापना की जिसके बाद विदेशियों की संख्या बढ़ने लगी। 1980 में ओशो 'अमेरिका' चले गए और वहां सन्यासियों ने 'रजनीशपुरम' की स्थापना की। भारतीय धर्मगुरु भगवान रजनीश का दावा था कि उनकी शिक्षाएं पूरी दुनिया को बदल कर रख देंगी.









ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक गैरेट उनकी शिष्या थीं. वो कहती हैं, “हम एक सपने में जी रहे थे. हंसी, आज़ादी, स्वार्थहीनता, सेक्सुअल आज़ादी, प्रेम और दूसरी तमाम चीज़ें यहां मौजूद थीं.”
शिष्यों से कहा जाता था कि वे यहां सिर्फ़ अपने मन का करें. वे हर तरह की वर्जना को त्याग दें, वो जो चाहें करें.
गैरेट कहती हैं, “हम एक साथ समूह बना कर बैठते थे, बात करते थे, ठहाके लगाते थे, कई बार नंगे रहते थे. हम यहां वो सब कुछ करते थे जो सामान्य समाज में नहीं किया जाता है.”
उन्मुक्त सेक्स यहां बिल्कुल सामान्य बात थी. भगवान रजनीश को सेक्स गुरु समझा जाता था. वे कहा करते थे कि वे सभी धर्मों से ऊपर हैं.

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