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कुचक्र से कराई पौने 6 बीघा जमीन की रजिस्ट्री एसडीएम ने की निरस्त

Thursday, 21 September 2017

/ by Durgesh Gupta

*कुचक्र से कराई पौने 6 बीघा जमीन की रजिस्ट्री एसडीएम ने की निरस्त*

 *रघुवीर जाटव को पुनः मिला मालिकाना हक*

 *करेरा शिवपुरी*:- अनुविभागीय दंडाधिकारी सीबी प्रसाद ने ग्राम जुझाई निवासी रघुवीर पुत्र हल्का जाटव से कुचक्र कर पोने छह बीघा जमीन गरीबे पुत्र धनसिंह जाटव द्वारा कराई रजिस्ट्री निरस्त कर एक अहम फैसला सुनाया है।

जानकारी के अनुसार रघुवीर सिंह पुत्र हल्का जाटव निवासी जुझाई ने अपनी पत्नी के इलाज हेतु गरीबे पुत्र धनसिंह जाटव से 31 जनवरी 2012 को ₹50000 उधार लेकर अपनी जमीन बंधक कराई थी, परंतु रघुवीर जाटव की   जमीन बंधक के स्थान पर रजिस्ट्री कब हो गई यह पता उसको कई दिनों बाद चला। तब उसने एसडीएम  न्यायालय में मामला दर्ज कराया एवम कुचक्र से कराई रजिस्ट्री को निरस्त कराए जाने की मांग की।
उसने बताया कि मैंने (रघुवीर सिंह) ने अपनी पत्नी के इलाज हेतु ₹50000 दो प्रतिशत ब्याज पर गरीबे पुत्र  धन सिंह जाटव से लिए थे। उसके एवज में ब्याज सहित 86 हजार रुपए वापस कर दिए ।
परंतु उसको जब बिक्रय पत्र होने की जानकारी लगी तो मानो उसके ऊपर पहाड़ टूट गया हो।

एसडीएम ने अपने न्यायालय में फैसला सुनाया की रघुबीर जाटव कुचक्र का शिकार हुआ है।
क्योकि रजिस्ट्री कराने की जानकारी उसे नही थी न ही उसको रजिस्ट्री में लिखे तीन लाख दस हजार रुपये मिले। जबकि जमीन की वास्तविक कीमत 5 लाख से अधिक है।
एसडीएम ने पाया कि गरीबे जाटव ने साहूकार बनकर रघुबीर को रुपये उधार दिए मगर जमीन बंधक के स्थान पर सर्वे क्रमांक 2502, 2503, 2504 ,2505 एवम 2496 की 1.17 हेक्टेयर भूमि  की  रजिस्ट्री करा ली। रघुवीर जाटव अनपढ़ एवं ग्रामीण परिवेश का व्यक्ति है एवं प्रार्थी के पास विक्रय पत्र में दर्शाई गई भूमि के अतिरिक्त आधा हेक्टर पट्टे की भूमि सलग्न अभिलेख से होना पाया जाता है इस प्रकार प्रार्थी के पास किसी भी स्थिति में 2 हेक्टर से कम भूमि है चूकि प्रार्थी एवं उनकी पत्नी पढ़ी लिखी नहीं है। अतः आर्थिक आवश्यकता के कारण कुचक्र में उलझने की अधिक संभावना है।  यह न्यायालय यह भी मानता है कि प्रार्थी के द्वारा संपूर्ण भूमि का विक्रय किया जाना  तय नहीं किया गया होगा। क्योंकि प्रार्थी को यह समझ अवश्य रही होगी की समस्त भूमि को बिक्रय करने से उनका जीवन यापन संभव नहीं हो सकेगा। यह कुचक्र से परित्राण तथा मुक्ति दिलाए जाने के उद्देश्य से शून्य घोषित किया जाना आवश्यक है।
यह मामला कुचक्र से परित्राण तथा मुक्ति अधिनियम 1976 की धारा 4,5,6 एवम 7 के अंतर्गत आने से  दिनांक 31 जनवरी 2012 को विक्रय पत्र क्रमांक 1251 को किया गया उक्त विक्रय पत्र शून्य करते हुए पुनः पौने छह बीघा जमीन पर रघुबीर जाटव     को मालिकाना हक देने का फैसला सुनाया है।
यह फैसला इस न्यायालय का अहम व पहला फैसला है।

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