Latest

latest

,ऑनलाइन सट्टा किंग पकड़ा ,२०० करोड़ का लगता था सट्टा, 15 देशो की पुलिस को थी तलाश

Monday, 22 May 2017

/ by Durgesh Gupta

इंदौर.  मुंबई क्राइम ब्रांच ने पकड़ा ऑनलाइन सट्टा किंग  के नाम से मशहूर रमेश चौरसिया  जिसका  २०० करोड़ प्रति वर्ष का होता था व्यापार जिसका ऑफिस ४८ वी मंज़िल पर था ,मंत्री और नेताओ के नंबर थे उसके मोबाइल में ,रोजाना लगता था २ करोड़ का सट्टा ,, 15 देशो  सहित  5 राज्यों में फैला था सट्टा के नेटवर्क का खुलासा  ?



 ऑनलाइन गेमिंग के सट्टा किंग रमेश चौरसिया ने मुंबई स्थित ऑफिस से इंदौर क्राइम ब्रांच को कई अहम जानकारियां मिली हैं। टीम ने ऑफिस से कम्प्यूटर, हार्ड डिस्क सहित अन्य सामान जब्त किया है। उसके मोबाइल कॉल डिटेल में कई बड़े मंत्री, पुलिस अधिकारी व रसूखदारों के नंबर पाए गए हैं। चौरसिया ने यहां 48 माले की बिल्डिंग में ऑफिस खोल रखा है और इसमें आने-जाने के लिए एक सीक्रेय लिफ्ट लगवा रखी है। ऑफिस इतना हाईटेक था कि हर हलचल की खबर चौरसिया को पता चल जाती थी।



मंत्री नेताओं के नंबर थे मोबाइल में
- एएसपी क्राइम ब्रांच अमरेंद्रसिंह चौहान ने बताया आरोपी रमेश ने 15 देशों सहित सात राज्यों में ऑनलाइन गेमिंग के सट्टे का नेटवर्क फैला रखा था। इसकी कंपनी द्वारा 200 करोड़ रुपए का बिजनेस प्रतिवर्ष किया जा रहा था। रोज इसकी कंपनी पांच करोड़ का सट्टा लगवाती है।
- सूत्रों के मुताबिक, क्राइम ब्रांच की टीम जैसे ही मुंबई के ऑफिस पहुंची तो मुंबई पुलिस के कई कर्मचारियों सहित कुछ प्रभावशील लोग मौके पर पहुंच गए। वहीं, उत्तरप्रदेश के कई बड़े नेताओं ने क्राइम ब्रांच के अफसरों से चर्चा भी की है। हालांकि अफसरों ने इसकी पुष्टि नहीं की है। इधर, क्राइम ब्रांच ने जब कंपनी के अकाउंट डिटेल चेक किए तो आरोपी की कंपनी द्वारा लीगल तौर पर कमाई का टैक्स भरने की जानकारी भी सामने आई है। इस दौरान चौरसिया के लीगल एडवाइजर व सीए भी उपस्थित थे।

सट्‌टा किंग के नाम से मशहूर
- आॅनलाइन गेमिंग के जरिए सट्टा चलाने वाला रमेश चौरसिया सट्टा किंग के नाम से मसहूर है। रमेश ने गेम संचालित करने के लिए ऐसे सॉफ्टवेयर से तैयार करवाया था, जिसमें ग्राहक कभी जीतता ही नहीं था और उसका पूरा पैसा डूब जाता था।
- एएसपी अमरेंद्र सिंह चौहान ने बताया आरोपी रमेश पिता लख्खूलाल चौरसिया परेल मुंबई का रहने वाला है। वह गेमिंग इंडिया प्रालि के नाम से ऑनलाइन सट्टा चलाता है।
- चौरसिया ने 1976 में मुंबई के हिंदूजा कॉलेज से बी कॉम की पढ़ाई की। इसने 1981 में एक छोटा-सा स्कूल खोला और उसमें बच्चों के लिए ऑनलाइन गेम की शुरुआत की। कुछ ही दिनों में भीड़ लगने लगी। इसी दौरान उसे आइडिया आया और खुद का एक सॉफ्टवेयर बनवाया।
- इसके बाद रमेश ने गेमिंग इंडिया प्रालि. के नाम से फाइनेंस कंपनी खोल ली। इसके जरिए करोड़ाें रुपए कमाए। बाद में इसे गेमिंग कंपनी के रूप में रजिस्टर्ड करवाया।

ऐसे चलाता था सट्टे का गेम
- गेमिंग की एजेंसी लेने वालों को एक पेरेंट लाइन दी जाती थी। लाइन से एजेंसी लेने वाला कितनी भी चाइल्ड लाइन बनाकर बेच सकता था। एजेंसी लेने वाले को जो पैसा जमा करवाता था उसका 25 प्रतिशत उसे मिलता था। इसके अलावा गेम खेलने के दौरान मिलने वाली आय से भी उसे मुनाफा पहुंचता था।
- मप्र में राहुल के पास इसकी एजेंसी थी। उसने 10 पेरेंट लाइन बनाई थी और 100 से ज्यादा चाइल्ड लाइन बनाकर बेचे चुका था। उसके पास 100 टेबल थी, जिस पर वह लाइनें संचालित करता था। इसके मैनेजर, दुकानदारों को कंपनी की ओर से क्लाइंट बनाते हैं और उन्हें आईडी कार्ड जारी करते हैं।

- मैनेजर यहां दुकानदार के सिस्टम या लैपटॉप के जरिए गेम चलाता है। इसमें एक रुपए में एक प्वॉइंट बेचा जाता है। कस्टमर के हार पर 10 पैसे मैनेजर को और 50 पैसे दुकानदार को दिए जाते हैं। यदि कस्टमर जीत जाता है तो रुपए का भुगतान मैनेजर को करना होता है। हारने पर उसे फिर से प्वॉइंट खरीदना होता है।

- क्राइम ब्रांच ने बताया कि रमेश ने मुंबई में 48 माले की बिल्डिंग में ऑफिस खोल रखा है। किसी के भी बिल्डिंग में घुसते ही रमेश को जानकारी हो जाती थी और वह अंडरग्राउंड रास्तों से फरार हो जाता। रमेश ने यहां एक सीक्रेट लिफ्ट लगवा रखी है, जिसके जरिए ये आना-जाना करता था। आॅफिस में हर हलचल की जानकारी रमेश के पास होती थी।

No comments

Post a comment

Don't Miss
© all rights reserved
made with by templateszoo